बैतूल। जिले के ग्राम चूड़िया में पशु प्रेम की अनोखी मिसाल देखने को मिली है। दरअसल 25 साल से गांव के एक किसान के परिवार के सदस्य की तरह रहे भैंसे की मौत हो गई। किसान परिवार की आर्थिक उन्नति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले भैंसे की मौत होने से पूरे परिवार में मातम छा गया।

परिवार ने भैंसे का नाम राजाजी रखा था। 25 साल तक परिवार की आमदनी का सहारा रहे भैंसे की मौत के बाद ग्रामीणों के साथ उसका हिन्दू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार किया गया। सोमवार को तेरहवीं में आसपास के दर्जन भर गांवों के लोगों को आमंत्रित किया गया और श्रद्धांजलि देने के बाद भोज कराया गया।

राजाजी ने बदल दिए मेरे दिन

चूड़िया गांव में मात्र ढाई एकड़ जमीन के मालिक मुसरू यादव ने बताया कि खेती में कुछ होता नहीं था और वह मजदूरी करने के लिए दूसरे किसानों के खेतों में जाता था। 25 साल पहले 25 माह के पाड़े को घर लाया और उसका पालन पोषण किया। जब वह युवा अवस्था में पहुंचा तो प्रजनन के कार्य से परिवार को आय होने लगी। अच्छी देखभाल के कारण दूर-दूर के गांवों से लोग अपनी भैंसों को प्रजनन के लिए लेकर आने लगे और मुसरू यादव के परिवार को अतिरिक्त आय होने लगी थी।

ठेके पर दिया खेत और कराया भोज

किसान मुसरू यादव ने बताया कि परिवार के सदस्य राजाजी के चले जाने के बाद से परिवार सदमे में हैं। उसके तेरहवी कार्यक्रम के लिए 50 हजार रुपए में अपना खेत ठेके पर दे दिया और पूरा आयोजन कराया। मुसरू ने बताया कि राजाजी ने ही परिवार को आर्थिक संकट से उबारा था और इसी के कारण श्रद्धांजलि देकर गांव को भोज कराया गया है।

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