हर साल की तरह इस साल भी आपको अपना आयकर रिटर्न इलेक्ट्रॉनिक स्वरूप में ही फाइल करना है। कुछ विशेष तरह के करदाताओं को अब अपनी सीए फर्म का रजिस्ट्रेशन नंबर देना होगा जिसने उसका ऑडिट किया है। कंपनियों को अब प्रॉपर्टी से होने वाली आय को भी घोषित करना होगा। फर्म को अब अपने पार्टनर और सदस्यों का आधार नंबर फॉर्म में लिखना होगा। अगर ट्रस्ट है तो उसका काम चलाने वालों का आधार नंबर देना होगा। आयकर रिटर्न भरने में टालमटोल का रवैया ठीक नहीं होता है। इस चक्कर में कई बार मोटी पेनल्टी देनी पड़ती है। वहीं, समय पर आयकर रिटर्न भरने के कई फायदे भी हैं। हम आपको ऐसे ही 10 फायदों के बारे में बता रहे हैं।

पते का सबूत

आयकर रिटर्न की कॉपी वैध पता प्रमाण है। सभी सरकारी विभागों में यह मान्य है। आधार या पासपोर्ट के आवेदन में अड्रेस प्रूफ के तौर पर इसे इस्तेमाल किया जा सकता है।

नुकसान की भरपाई

शेयर बाजार में निवेश पर पूंजीगत घाटा होता है, तो आईटीआर भविष्य में होने वाले लाभ से नुकसान को समायोजित करने की अनुमति देता है। .

बिजनेस में फायदेमंद

बिजनेस शुरू करने या सरकारी ठेका लेने के लिए आयकर रिटर्न जरूरी है। सरकारी ठेका लेने के लिए पांच सालों का रिटर्न देना होता है। .

बड़े लेन-देन में सहयोगी

प्रॉपर्टी खरीदना या बेचना, बैंक में बड़ी रकम जमा करना, म्यूचुअल फंड में बड़े निवेश के बाद आयकर विभाग से नोटिस आने का चांस होता है। लेकिन रिटर्न भरने वालों को यह टेंशन नहीं होती।

टीडीएस क्लेम में जरूरी

अगर आप फ्री लांसिंग या कोई काम करते हैं और आपकी आय कर योग्य नहीं है। लेकिन फिर भी टीडीएस काटा है तो आयकर रिटर्न भर कर आप टीडीएस रिफंड ले सकते हैं।

ऊंचा बीमा कवर

50 लाख से एक करोड़ तक के टर्म इंश्योरेंस लेने के लिए आयकर रिटर्न की कॉपी जरूरी है। बीमा कंपनियां इससे आय पता करती हैं।

वीजा में आसानी

कई विदेशी दूतावास वीजा आवेदन में 2 साल का आयकर रिटर्न मांगते हैं। आईटीआर की कॉपी होने पर वीजा मिलने में आसानी होती है।

जुर्माने की चिंता नहींं

आयकर रिटर्न देरी से भरने पर 10,000 रुपये तक जुर्माना लग सकता है। वहीं, सही समय पर रिटर्न भर कर जुर्माना देने या नोटिस से बचा जा सकता है।

बैंक से लोन, क्रेडिट कार्ड लेना भी आसान होगा

होम या कार लोन के लिए बैंक 2 से 3 साल का आयकर रिटर्न मांगते हैं। रिटर्न की कॉपी होने पर लोन मिलना आसान हो जाता है। क्रेडिट कार्ड लेने में भी यह सहायक है। क्रेडिट कार्ड कंपनियां भी आयकर रिटर्न को प्राथमिकता देती हैं।

ब्याज से मिलती है राहत

कर की देनदारी है और आयकर रिटर्न फाइल नहीं किया तो कर के साथ ब्याज देना पड़ सकता है। धारा 234ए के तहत जुर्माना भी लग सकता है। रिटर्न भरने से जुर्माना या ब्याज नहीं देना होगा।

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