रायपुर। सरकार के खिलाफ आदिवासियों ने फिर हुंकार भर दी है। सर्व आदिवासी समाज ने एलान किया है कि 17 जून को जशपुर जिले के कुनकुरी में पत्थलगढ़ी के समर्थन में बड़ा आंदोलन किया जाएगा। इस आंदोलन में एक लाख से ज्यादा आदिवासियों को लाने की तैयारी की जा रही है।

आदिवासी समुदाय लगातार सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है। भू राजस्व कानून में संशोधन के प्रयासों के बाद आदिवासी सरकार के खिलाफ लामबंद हुए तो सरकार को कदम वापस खींचने पर मजबूर होना पड़ा था। इसके बाद कुछ महीने शांति रही लेकिन फिर पत्थलगढ़ी का मुद्दा सामने आ गया।

दरअसल जशपुर जिले के कुछ अनुसूचित जनजाति बहुल गांवों में पत्थर गाड़कर आदिवासियों ने उसपर संविधान की धाराएं लिख दीं। लिखा कि आदिवासी इलाकों को संविधान से विशेषाधिकार मिले हैं जिसका हनन नहीं किया जा सकता। कुछ जगहों पर बिना अनुमति इन इलाकों में प्रवेश पर प्रतिबंध भी लगाया गया।

इस मुद्दे ने तूल पकड़ लिया। अप्रैल में जशपुर के विधायक ने पत्थलगढ़ी के विरोध में रैली निकाली जिसमें पत्थरों को तोड़ दिया गया। इसके बाद से इलाके में तनाव बना हुआ है। यह मुद्दा हिंदू आदिवासी बनाम क्रिश्चियन आदिवासी भी बन गया। सर्व आदिवासी समाज के सचिव बीएस रावटे ने नईदुनिया से कहा कि धर्म कोई भी हो, हम सभी आदिवासी हैं। हमारी परंपरा एक है।

उन्होंने कहा कि हमारे लोगों को पत्थर गाड़ने के आरोप में जेल में बंद कर दिया गया है। कुनकुरी इलाके में लोग भयभीत हैं। इसीलिए वहां बड़ा प्रदर्शन करने की योजना बनाई गई है। कोरिया, जशपुर, अंबिकापुर, रायगढ़, कोरबा आदि जिलों से समाज के लोगों को एकत्र किया जा रहा है।

कुनकुरी में सभा होगी जिसमें एक लाख आदिवासी जुटेंगे। रावटे ने कहा अब पत्थलगढ़ी पूरे प्रदेश में होगी। वर्तमान में अनुसूचित जनजाति बहुल गांवों में सरकार ग्राम सभाओं का आयोजन कर रही है। सर्व आदिवासी समाज ने सभी गांवों को पत्थलगढ़ी का प्रस्ताव पारित करने को कहा है।

जिन ग्रामों में ग्रामसभा हो रही है वहां इस प्रस्ताव का प्रारूप भेजा गया है। सरकार चुनावी साल में आदिवासी वोट बैंक को साधने में लगी है लेकिन आदिवासी समुदाय लगातार आंदोलन की राह पर है। सर्व आदिवासी समाज ने अपने प्रभाव वाली 18 सीटों पर चुनाव लड़ने की भी घोषणा की है।

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