मल्टीमीडिया डेस्क। रुद्राक्ष की महिमा का वर्णन शिवपुराण, रुद्रपुराण, लिंगपुराण, श्रीमद्भागवत गीता में मिलता है। रुद्राक्ष को भगवान शिव का पूर्ण प्रतिनिधित्व प्राप्त है। चंद्रमा शिवजी के मस्तक पर सदा विराजमान रहता है, अतः चंद्र ग्रह जनित कोई भी कष्ट हो, तो रुद्राक्ष से दूर हो जाता है।

किसी भी प्रकार की मानसिक उद्विग्नता, रोग एवं शनि के द्वारा पीड़ित चंद्र अर्थात साढ़े साती से मुक्ति में रुद्राक्ष अत्यंत उपयोगी है। शिव सर्पों को गले में माला बनाकर धारण करते हैं। अतः काल सर्प जनित कष्टों के निवारण में भी रुद्राक्ष विशेष उपयोगी होता है।

मगर, आजकल हर शहर, हर बाजार में रुद्राक्ष की दुकानें हैं। हालांकि, इसकी पहचान करना बहुत ही कठिन है। एक मुखी व एकाधिक मुखी रुद्राक्ष महंगे होने के कारण नकली भी बाजार में बिक रहे हैं। जानिए कैसे कर सकते हैं असली और नकली रुद्राक्ष की पहचान...

रुद्राक्ष की पहचान के लिए रुद्राक्ष को कुछ घंटे के लिए पानी में उबालें यदि रुद्राक्ष का रंग न निकले या उस पर किसी प्रकार का कोई असर न हो, तो वह असली होगा।

तांबे का एक टुकड़ा नीचे रखकर उसके ऊपर रुद्राक्ष रखकर फिर दूसरा तांबे का टुकड़ा रुद्राक्ष के ऊपर रख दिया जाए और एक अंगुली से हल्के से दबाया जाए, तो असली रुद्राक्ष नाचने लगता है। यह पहचान अभी तक प्रमाणिक हैं।

रुद्राक्ष की पहचान के लिए उसे सुई से कुरेदें। अगर रेशा निकले तो असली और न निकले तो नकली होगा।

शुद्ध सरसों के तेल में रुद्राक्ष को डालकर 10 मिनट तक गर्म करने पर असली रुद्राक्ष होने पर वह अधिक चमकदार हो जाएगा। नकली है, तो वह धूमिल हो जाएगा।

पानी में डूबने वाला रुद्राक्ष असली और तैरने वाला नकली माना जाता है। लेकिन यह सच नहीं है। पका हुआ रुद्राक्ष पानी में डूब जाता है, जबकी कच्चा रुद्राक्ष पानी पर तैर जाता है। इसलिए इस प्रक्रिया से रुद्राक्ष के पके या कच्चे होने का पता तो लग सकता है, असली या नकली होने का नहीं।

नकली रुद्राक्ष के ऊपर उभरे पठार एक जैसे होंं, तो वह नकली रुद्राक्ष है। असली रुद्राक्ष की उपरी सतह कभी भी एक जैसी नहीं होगी। जैसे दो मनुष्यों के फिंगरप्रिंट एक नहीं होते हैं, उसी तरह दो रुद्राक्षों के उपरी पठार समान नहीं होते।

कभी-कभी दो या तीन रुद्राक्ष प्राकृतिक रूप से जुड़े होते हैं। इन्हें गौरी शंकर या गौरी पाठ रुद्राक्ष कहते हैं। इनका मूल्य काफी अधिक होता है, इस कारण इनके नकली होने की संभावना भी उतनी ही बढ़ जाती है।

विदेश