चीन में रविवार को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के राष्ट्रपति ममनून हुसैन ने हाथ मिलाए। दोनों के बीच संक्षिप्त बातचीत भी हुई। लेकिन कोई द्विपक्षीय वार्ता नहीं की। 
मोदी ने अपने संबोधन में अफगानिस्तान के जरिए बिना नाम लिए पाकिस्तान पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान आतंकवाद का सबसे दुर्भाग्यपूर्ण उदाहरण है। उन्होंने कहा, उम्मीद है कि अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने देश में शांति के लिए जो साहसिक कदम उठाए हैं, क्षेत्र में सभी लोग इसका सम्मान करेंगे। 

ओआरओबी पर विरोध

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परोक्ष रूप से चीन की ‘वन बेल्ट वन रोड’ (ओबीओआर) का विरोध किया। उन्होंने कहा कि संपर्क परियोजनाओं को लागू करने से पहले देशों की संप्रभुत्ता और एकता का सम्मान करना चाहिए। दोनों आधारों पर खरी उतरने वाली और समावेशी परियोजनाओं का भारत समर्थन करेगा। ओआरओबी के तहत चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) के पाक अधिकृत कश्मीर से गुजरने का कारण भारत इसका विरोध कर रहा है। 

बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट का विरोध

सम्मेलन के दौरान भारत ने चीन की बेल्ट चीन की बेल्ट एंड रोड परियोजना पर अपना कड़ा विरोध जताया। भारत लगातार इस परियोजना का विरोध कर रहा है क्योंकि यह पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से होकर गुजरती है। वहीं, पाकिस्तान समेत अन्य सदस्य देशों ने चीन की इस परियोजना को समर्थन दिया। 

उरी हमले के बाद से तनाव

वर्ष 2016 में उरी में सैन्य अड्डे पर हमले के बाद से भारत और पाक के संबंधों में तनाव आ गया था। भारत की दलील है कि आतंक और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते। 

सार्क सम्मेलन का बहिष्कार

भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को पाक सैन्य अदालत द्वारा जासूसी के आरोप में मौत की सजा सुनाए जाने से संबंध और बिगड़ गए। भारत ने विरोध दर्ज कराने के लिए 2016 में इस्लामाबाद में 19वें सार्क सम्मेलन का बहिष्कार कर दिया था। इसके बाद सम्मेलन रद कर दिया गया।

पहली बार सदस्य देश बने

चीन एससीओ का मेजबान था। यह पहली बार था जब भारत और पाकिस्तान दोनों ही सदस्य देश के रूप में सम्मेलन में शामिल हुए। दोनों देशों के बीच सीमा विवाद के मद्देजनर भी इस बार का सम्मेलन खास माना गया।

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