अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने गुरुवार को घोषणा की कि मंगल पर 2012 में उतरे खोजी रोबोट क्यूरियोसिटी को चट्टानों में तीन अरब साल पुराने कार्बनिक अणु मिले हैं। यह खोज इशारा करती है कि उस समय इस ग्रह पर जीवन रहा होगा। नासा के सौर प्रणाली अन्वेषण विभाग के निदेशक पॉल महाफी ने कहा कि यह एक रोमांचक खोज है, हालांकि फिर भी इससे इस बात की पुष्टि नहीं होती कि अणुओं का जन्म कैसे हुआ।

इस तथ्य के बावजूद कि यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि ये अणु कैसे निर्मित हुए थे, नासा ने कहा है कि इस प्रकार के कण मंगल ग्रह पर काल्पनिक सूक्ष्मजैविकी के खाद्य स्रोत हो सकते हैं। मैरीलैंड में स्थित नासा के गोर्डाड स्पेस सेंटर की जेनिफर एगनब्रोड ने कहा कि मंगल ग्रह पर पाए गए कार्बनिक अणु जीवन के विशिष्ट प्रमाण प्रदान नहीं करते हैं, क्योंकि वे ‘गैर-जैविक’ चीजों के हो सकते हैं।

जेनिफर के अनुसार, हालांकि किसी भी मामले में अणु मंगल ग्रह पर जीवन की निरंतर खोज में वैज्ञानिकों को महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान कर सकते हैं, क्योंकि हम जिस जीवन के बारे में जानते हैं, वह कार्बनिक अणुओं पर आधारित है। उन्होंने कहा कि हालांकि मंगल की वर्तमान सतह में जीवन नहीं पनप सकता है। लेकिन संभवत: पहले कभी मंगल का वातावरण पानी या तरल पदार्थ को ग्रह की जमीन पर मौजूद रखने में सक्षम था।

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