रायपुर। ग्रामीण साक्षरता के बाद अब प्रदेश में शहरी क्षेत्रों में मुख्यमंत्री डिजिटल साक्षरता अभियान चलाने की तैयारी है। ऐसी बसाहटें, जहां अकुशल मजदूर, कामगार, घरेलू कार्यों में लगे व्यक्तियों की संख्या ज्यादा है, वहां शहरी कार्यात्मक डिजिटल साक्षरता की पहल शुरू भी कर दी गई है। इस कार्यक्रम को बेहतर करने के लिए राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण की ओर से शुक्रवार को कार्यशाला में मंथन हुआ। दो दिवसीय कार्यशाला में अभियान की रूपरेखा और मार्गदर्शिका का निर्माण किया गया।

सूचना और संचार के कौशल की बुनियादी समझ को लेकर इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का उद्देश्य जन सामान्य के बीच इस कौशल को विकसित करना है। डिजिटल यानी ऑनलाइन से लेकर मोबाइल तक ऑपरेटिंग करने की क्षमता लोगों में विकसित करने का काम साक्षरता अभियान के तहत होगा।

दैनिक जीवन में उपयोग करने लायक ज्ञान और व्यवहार, इसका मकसद है। कार्यशाला में जिलों के जिला परियोजना अधिकारी सहित विशेषज्ञ स्रोत व्यक्ति शामिल रहे। राज्य सारक्षरता मिशन के संचालक एस. प्रकाश ने प्रतिभागियों से राज्य के अनुरूप कार्ययोजना का प्रारूप बनाने का सुझाव दिया।

उन्होंने कहा कि संचार का तरीका बदल गया है और कार्ययोजना इस तरह बनाई जाए कि सहज-सरल तरीके से सभी इससे जुड़कर लाभान्वित हों। इसके साथ ही कार्यक्रम की गुणवत्ता बनाए रखने सतत्‌ मॉनिटरिंग की भी योजना बनाई जाए।

डिजिटल साक्षरता आज की जरूरत

कार्यक्रम में सहायक संचालक प्रशांत पांडेय ने कहा कि ऑनलाइन कार्यों के लगातार बढ़ने के कारण आज डिजिटल कार्यात्मक साक्षरता बेहद जरूरी है। ऐसे लोग, जो किन्हीं कारणों से डिजिटली साक्षर नहीं हो पाए, उनके लिए यह अभिनव शुरुआत की जा रही है।

प्रशांत पाण्डेय ने प्रतिभागियों के बीच विषय वस्तु तथा आवश्यकता, संरचना, क्रियान्वयन, मॉनिटरिंग-मूल्यांकन, बजट एवं प्रचार-प्रसार के लिए सूचना संचार तकनीक पर चर्चा की। इस अवसर पर सहायक संचालक दिनेश टांक ने लक्ष्य, उद्देश्यों तथा गतिविधियों, कार्ययोजनाओं पर विस्तार से जानकारी दी। इस मौके पर बड़ी संख्या में साक्षरता के अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए।

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