झुलसा देने वाली गर्मी और पानी की कमी से परेशान देश का मानसून की प्रतीक्षा अत्यंत व्याकुलता के साथ है। तापमान में वृद्ध से देश बीते तीन-चार माह में बुरी तरह तप चुका है। अब यह गर्मी असहनीय होती जा रही है। गर्मी से निजात बेहतर मानसून ही दिला सकता है, इसलिए देशभर में मानसून की प्रतीक्षा है। इसी के साथ लगभग पूरे भारत में पानी की कमी से जनता हलाकान है। नदी-तालाब सूख गए हैं और कुछ सूखने की कगार पर हैं। पेयजल के स्रोत खत्म हो गए हैं। स्थानीय प्रशासन को पानी की आपूर्ति करने में कठिनाई जा रही है। बीते दिन ग्वालियर की ही तस्वीर सामने आई है, जिसमें पुलिस के पहले में पानी बाँटना पड़ रहा है। जनता की यह प्यास भी अच्छी बारिश ही बुझा सकती है। जिस प्रकार की हम सबकी प्रवृत्ति है, उसके आधार पर इसकी उम्मीद बेमानी है कि हमने इन संकटों से कोई सबक लिया होगा। इसके बाद भी मानसून आ रहा है तो हमें भी शासन और नागरिक स्तर पर उसके स्वागत के लिए अपनी तैयारी करनी चाहिए। डोल-नगाड़े नहीं बजाने हैं, बल्कि जन जागरण करना है। बारिश का जल सहेजने के लिए व्यवस्थाएं बनानी है। आसमान से जो नेमत बरसेगी, उसे व्यर्थ बहने और बर्बाद होने से बचाने के प्रयास करने चाहिए। अपने आस-पास खत्म हो चुके पानी के स्रोतों को जीवित करना होगा। नदी-तालाबों का गहरीकरण करना चाहिए। नये तालाबों का निर्माण करना चाहिए। वाटर हार्वेस्टिंग के सामूहिक और व्यक्तिगत प्रयास करने होंगे। तब कहीं जाकर अच्छे मानसून का वास्तविक लाभ हम ले पाएंगे। वरना मानसून आएगा, कुछ दिन की प्यास बुझा देगा। उसके बाद फिर से हम इन्हीं सकंटों से जूझेंगे। बहरहाल, मानसून ने इस बार नियत समय से कुछ पहले दस्तक देने के साथ ही इस बार मानसून पिछले साल से बेहतर रहने का भरोसा दिलाया है। मौसम विभाग के मुताबिक, पूरे देश में मानसून जून से सितंबर के दौरान 96 से 104 फीसदी रहेगा। 2017 में देश में 97 फीसदी बारिश दर्ज की गई थी, जो सामान्य मानी जाती है। थोड़ी बारीकी से देखें तो इस 'सामान्यÓ और 'बेहतरÓ मानसून की भविष्यवाणी में भी चिंता के पहलू बने हुए हैं। जून से सितंबर के बीच 96 से 104 फीसदी बारिश को सत्य मान लें तब भी यह सवाल बचा रहता है कि किन इलाकों में कब और कितनी बारिश होगी? यह भी कि अच्छी बारिश की इस संभावना के पीछे किसी खास क्षेत्र में अतिवृष्टि तो दूसरे क्षेत्र में अनावृष्टि की आशंका तो नहीं छिपी हुई है? मौसम विभाग ने इन आशंकाओं को भी अपने अनुमान में शामिल करते हुए बताया है कि पूर्वी और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में मानसून 'सामान्य से कमÓ हो सकता है, लेकिन बाकी पूरे देश में ऐसा नहीं होना चाहिए। ऐसे ही जुलाई में मजबूत मानसून देखने के बाद देश अगस्त में सामान्य से कम मानसून का साक्षी बन सकता है, लेकिन राहत की बात यह है कि मौसम विभाग ने मिला-जुला कर पूरे देश के स्तर पर इस साल मानसून की संभावना को पिछले साल से बेहतर बताया है। गर्मी से तपते लोगों के लिए यह अच्छी खबर है और शेयर बाजार भी इसको अपने लिए राहत के तौर पर देख सकते हैं। खेती-किसानी से जुड़े लोगों को तो मानसून की कृपादृष्टि अत्यंत आवश्यक है। भारत की अर्थव्यवस्था के लिए भी अच्छे मानसून की खबर महत्वपूर्ण है। 

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