डबरा। एक ओर मध्यप्रदेश में कुपोषण दूर करने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र 'एनआरसी' में भर्ती कराकर उनके उपचार सहित खानपान पर करोड़ों रुपए का खर्च किए जा रहे हैं। दूसरी ओर एनआरसी में भर्ती बच्चों का एनआरसी प्रभारी डॉक्टरों की ओर से परीक्षण तक नहीं किया जा रहा है।

एनआरसी में भर्ती होने वाले कुपोषित बच्चे केवल डाइटीशियन और एनएमएम के उपचार के बाद डिस्चार्ज किए जा रहे हैं। ऐसा ही एक मामला डबरा के एनआरसी में देखने को मिला है। जहां विगत 15 दिनों से भर्ती कुपोषित बच्चों का प्रभारी डॉक्टर ने परीक्षण नहीं किया। जबकि दो बच्चे उपचार का समय पूरा हो जाने के बाद डिस्चार्ज हो गए।

पोषण पुनर्वास केंद्र डबरा में विगत 15 दिनों से भर्ती होने वाले कुपोषित बच्चों का एनआरसी प्रभारी डॉ. एके शर्मा द्वारा परीक्षण नहीं किया गया। केंद्र में भर्ती बच्चों को डाइटीशियन अर्पिता माहेश्वरी और एनएनएम संध्या शर्मा द्वारा की केवल साधारण उपचार के साथ निर्धारित संतुलित आहार दिया जा रहा है।

बुधवार तक केंद्र में 19 बच्चे भर्ती थे, जिनमें से तीन बच्चों कुलदीप पुत्र राजाबेटी निवासी शुगर मिल दफाई, ईशान पुत्र सुनीता निवासी आठ नंबर आदिवासी दफाई गुलिहाई सहित एक अन्य बच्चे को उपचार की निर्धारित समयावधि पूरी होने के चलते डिस्चार्ज कर दिया गया। वर्तमान में केंद्र में 16 बच्चे भर्ती हैं। इनका भी केंद्र प्रभारी डॉ. एके शर्मा द्वारा परीक्षण नहीं किया गया है और न ही बच्चों के एक्सरे और ब्लड की जांचों को कोई देखता है। डिस्चार्ज किए गए बच्चों में डाइटीशियन और एएनएम द्वारा किए गए सामान्य उपचार से मामूली सुधार आया है।

धूल खा रहीं रिपोर्ट और एक्सरे

केंद्र में भर्ती होने वाले बच्चों का भर्ती के समय कई प्रकार का परीक्षण कराया जाता है। इसमें एक्सरे, एचआईवी, एचवी, ट्यूबर क्लॉसिस आदि का परीक्षण किया जाता है। परीक्षण के बाद डॉक्टर द्वारा इन रिपोर्टों को चेक कर बच्चे की बीमारियों का पता लगाया जाता है। लेकिन केंद्र में भर्ती सभी बच्चों की उपरोक्त रिपोर्ट और एक्सरे को डॉ. एके शर्मा चैक नहीं करते हैं। बच्चों के एक्सरे और रिपोर्ट केंद्र में धूल खा रहीं है।

ओपीडी से एनआरसी नहीं पहुंच पाते डॉक्टर

एनआरसी प्रभारी डॉ. एके शर्मा सिविल अस्पताल की ओपीडी में बैठते हैं। सिविल अस्पताल से एनआरसी की दूरी महज 30 मीटर है। लेकिन डॉ. शर्मा ने एनआरसी में जाकर बच्चों की रिपोर्ट चेक कर उपचार करने को जरूरी नहीं समझा है। ऐसी स्थिति में अगर किसी बच्चे में गंभीर बीमारी हो तो बिना रिपोर्ट चेक किए उसका पता कैसे चलेगा। इस स्थिति में बच्चे के साथ गंभीर हादसा भी हो सकता है।

भितरवार में जिला परियोजना अधिकारी ने बच्चों को भर्ती कराया

बुधवार को चीनौर के भागीरथ का पुरा की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता स्वाति नरवरिया गांव के तीन कुपोषित बच्चों श्याम पुत्र शिवसिंह आदिवासी, मोहिनी पुत्री वीरेन्द्रसिंह और ईशानी पुत्री महेन्द्र आदिवासी को लेकर भितरवार एनआरसी में भर्ती कराने पहुंचीं। लेकिन 10 पलंग की एनआरसी में पहले से ही 11 बच्चे भर्ती होने के चलते केंद्र प्रभारी डॉ. गिर्राज गुप्ता ने भर्ती करने में असमर्थता जाहिर करते हुए डबरा की एनआरसी में जाने के लिए कहा। लेकिन परिजनों ने डबरा जाने से मना कर दिया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने सुपरवाइजर भावना पाठ्या को स्थिति से अवगत कराया जिन्होंने महिला बाल विकास विभाग के जिला परियोजना अधिकारी राजीवसिंह को अवगत कराया। इसके चलते डॉ. सिंह ने एनआरसी प्रभारी से बात कर बच्चों को भर्ती करने के लिए निर्देशित किया, तब बच्चे भर्ती हो सके।

इनका कहना है

एनआरसी प्रभारी के द्वारा बच्चों की रिपोर्ट चेक न करना गंभीर मामला है। इसकी जांच कराई जाएगी और प्रभारी डॉक्टर को रिपोर्ट चेक करने के लिए निर्देशित किया जाएगा। जांच में दोषी पाए जाने पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी - डॉ. एमएल कदम, सीबीएमओ

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