सांस्कृतिक रूप से भारत से जिनके अत्यंत निकट और आत्मीय संबंध हैं, ऐसे देश इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर की अपनी पांच दिवसीय यात्रा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लौट आए हैं। इस दौरान उन्होंने तीन दिन इंडोनेशिया में और बाकी दो दिन मलेशिया-सिंगापुर में बिताए। तीनों ही देशों में प्रधानमंत्री का भव्य स्वागत हुआ, महत्वपूर्ण विमर्श और आवश्यक समझौते भी हुए। इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की मौजूदगी में 15 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए, जिनमें दोनों सरकारों के बीच 9 जबकि 6 सरकारी और निजी संगठनों के बीच हैं। दोनों देशों ने समुद्री सहयोग पर साझा दृष्टिपत्र भी जारी किया। हालांकि इंडोनेशिया ने प्रधानमंत्री मोदी के आने के पहले ही भारत को सबांग बंदरगाह के सैन्य और व्यापारिक प्रयोग की अनुमति दे दी थी। रक्षा और समुद्री सुरक्षा के अलावा भारत-इंडोनेशिया के बीच सहयोग की काफी संभावनाएं हैं। दोनों देशों के बीच अभी 17 अरब डॉलर से ज्यादा का सालाना व्यापार होता है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद के प्रति साझी लड़ाई में इंडोनेशिया को भी शामिल कर लिया। इंडोनेशिया के आतंकवाद के विरुद्ध हरसंभव मदद और साझी लड़ाई की सहमति दी है। वहीं, मलेशिया की संक्षिप्त यात्रा में प्रधानमंत्री मोदी वहां के प्रधानमंत्री महातिर मुहम्मद से मुलाकात करके तुरंत सिंगापुर निकल गए, जहां दो दिनी प्रवास के दौरान उनकी मुलाकात वहां के प्रधानमंत्री ली सेन लुंग और राष्ट्रपति हलीमा याकूब से हुई। इस दौरान दोनों देशों के बीच नर्सिंग, नेवी, साइबर सिक्योरिटी, नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने, दोनों देशों के वित्त मंत्रालयों, उद्योगों और सरकार के बीच तालमेल बढ़ाने के लिए भी कई समझौते किए गए। वर्ष 2005 में हुए व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते के बाद भारत और सिंगापुर के बीच व्यापार दोगुना होकर 25 अरब डॉलर सालाना हो चुका है। दोनों देशों ने इस पर संतोष जताया, लेकिन इन सबसे महत्वपूर्ण था प्रधानमंत्री मोदी का 17वीं शांग्री ला वार्ता में हिस्सेदारी, जिसे संबोधित करने वाले वह भारत के पहले प्रधानमंत्री बने। यहां अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि जब भारत और चीन भरोसे के साथ मिलकर काम करेंगे, तभी एशिया और विश्व का भविष्य बेहतर होगा। तीन देशों की यात्रा के आखिरी चरण में प्रधानमंत्री ने अमेरिकी रक्षामंत्री जिम मैटिस से बंद कमरे में मुलाकात की, जिसके बाद दोनों नेताओं ने दुनिया के सभी समुद्री रास्ते सबके लिए खुले रहने पर जोर दिया। हम कह सकते हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र्र मोदी की यह यात्रा उपलब्धियों से भरी रही। एक ओर महत्वपूर्ण समझौते तो हुए ही, वहीं दूसरी तरह यह भी संदेश गया कि साझा सांस्कृतिक मूल्यों और पहचान के कारण यह देश भारत के नजदीक हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पूर्व की ओर देखने और वहाँ के देशों के साथ अपने संबंधों को पुनर्परिभाषित करने की नीति पर बढ़ रहे हैं। 

विदेश