रायपुर। वन विभाग ने उजाड़ भूमि पर 2001 से अब तक 50 करोड़ पौधे रोपे। इसके बावजूद जंगल का रकबा बढ़ने या सीमित रहने के बजाय धीरे-धीरे घटता ही चला गया। इसमें हरियर छत्तीसगढ़ योजना के तहत शामिल रोपित पौधे भी हैं।

ये कोई महज विभागीय आंकड़ा नहीं, बल्कि महालेखा नियंत्रक से मिली ऑडिट रिपोर्ट से हकीकत पता चलती है। अभी तक 3700 वर्ग किलोमीटर जंगल का क्षेत्रफल घटा है। वैसे इसके बढ़ने का सिलसिला आज भी बदस्तूर जारी है, जबकि सरकार हरियर छत्तीसगढ़ समेत पौधरोपण करने की योजनाओं के तहत कार्य किए जाने की कहानी कागजों में तो है, लेकिन हकीकत में कुछ और ही तस्वीर है।

शासन ने सिर्फ पौधरोपण करने के लिए देसी तकनीकी ही अपनाई गई। वहीं इनके सुरक्षा और संरक्षा के लिए कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई। इसके अलावा अन्य भी कारण है, कि वन विभाग पौधों के रोपण की विधि को पुरानी पद्धति से ही करने में ही लगे हैं।

इसमें वैज्ञानिक तरीकों नहीं अपनाया जाना है। इसके साथ ही इनके रोपण करने के बाद पौधों की देखभाल करने में भी लापरवाही है। हालांकि वन विभाग ने रिकार्ड में पौधरोपण से जंगल और अन्य खाली भूमि को हरा भरा दिखाने में कोई कोसर नहीं छोड़ी।

मध्यप्रदेश की तर्ज हो पौधरोपण 

मध्यप्रदेश में सन 1986 से ही प्लांटेशन टेक्निक से पौधरोपण किया जा रहा है। इसमें रोपे के मुख्य बिंदु भी है। जैसे रोपण से एक साल पूर्व स्थान खोजें, ग्रीष्मकाल में ही गढ्डे खोदे और इसकी देखभाल पांच साल तक खुद वन विभाग करता है। 20 जुलाई तक रोपण पूर्ण होता है।

अब इतना हुआ है पौधरोपण 

2015 में 10 करोड़, 2016 में 7 करोड़ 60 लाख, 2017 में 8 करोड़ जंगल क्षेत्रों में रोपण करने वन विभाग द्वारा किया गया है। इसमें बाकी अन्य आबदी वाले इलाकों के आंकड़े इससे दो गुना है। फिर भी हालात जस के तस हैं।

वैज्ञानिक तरीके से रोपण नहीं करने पर याचिका दायर 

इधर इस बीच वन्य जीव प्रेमी ने प्रदेश में घटे जंगल के रकबे को लेकर जनहित याचिका भी दायर की है। इसके लिए हाईकोर्ट ने शासन से दो सप्ताह में जवाब मांगा है। इसकी सुनवाई भी अभी बीते दो जनवरी को हुई थी। इसमें पौधरोपण और रखरखाव के लिए वैज्ञानिक तरीका नहीं अपनाए जाने पर भी नाराजगी जताई है।

पौधे लगाने की प्रक्रिया पर आपत्ति 

भारत के नियंत्रक और महालेखा निरीक्षक ने पौधरोपण किए जाने के बाद भी जंगल का रकबा घटने पर नाराजगी जाहिर की। वहीं वन विभाग को मिले फंड पर भी आपत्ति जताई थी, कि बिना प्लानिंग किए फंड जारी न किए जाएं। इसकी को आधार बताकर जनहित याचिका दायर की गई है।

वैज्ञानिक तरीकों से पौध

रोपण होना चाहिए। महालेखा नियंत्रक की रिपोर्ट के बाद इनके सुरक्षा और संरक्षा को लेकर याचिका दायर किया हूं। इसके सुरक्षा के लिए ठोस योजना बननी चाहिए। - नितिन सिंघवी, वन्य जीव प्रेमी

इनके रोपण की विधि और सुरक्षा और संरक्षा पर प्लानिंग तैयार की जा रही है। - आरके सिंह, मुख्य वन संरक्षक

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