नई दिल्ली। रविवार को शिकागो में अमेरिकन सोसायटी ऑफ क्लीनिकल ओन्कोलॉजी (एएससीओ) 2018 की बैठक में बताया गया कि करीब 70 प्रतिशत स्तन कैंसर रोगियों को कीमोथेरेपी कराने की जरूरत नहीं होती है। आठ साल से हो रहे टेलरॉक्स अध्ययन के मुताबिक, 21-जीन टेस्ट से पता किया जा सकता है कि स्तन कैंसर के फिर से होने की आशंका है या नहीं।

डायग्नोज की तुलना में इलाज भी कम मुश्किल नहीं है। कीमोथेरेपी और उसके संबंधित साइड इफेक्ट्स के तौर पर बालों का झड़ना, मतली इत्यादि की आशंका होती है। टेलरोक्स स्टडी के अनुसार, 21 जीन टेस्ट से पता किया जा सकता है कि क्या दोबारा ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा है, एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन के लिए रिसेप्टर हैं, लिम्फ नोट में नहीं हैं और HER2 नाम का प्रोटीन नहीं है और चार सेंटीमीटर से आकार में छोटा है।

इन ट्यूमर्स में हार्मोन्स रिसेप्ट्स के मौदूद होने का अर्थ होता है कि वह हार्मोन्स के ट्रीटमेंट में प्रतिक्रिया देगा। न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित होने के साथ ही एएससीओ में पेश हुए इस अध्ययन के सह-लेखक ने कहा कि इस ग्राउंडब्रैकिंग स्टडी के नतीजों के साथ हम कह सकते हैं कि करीब 70 फीसद मामलों में कीमोथैरेपी की जरूरत नहीं होती है।

लोयोला यूनिवर्सिटी हेल्थ सिस्टम में ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. कैथी अल्बेन ने कहा कि अनगिनत महिलाओं और उनके डॉक्टरों के लिए अनिश्चितता के दिन खत्म हो गए हैं। उन्होंने कहा कि यह अध्ययन टेस्ट ऑनकोटाइप डीएक्स पर आधारित है, जो रोगी के बायोप्सी नमूने से 21 जीन की जांच करता है और यह पता करता है कि वे कितने सक्रिय हैं। ट्यूमर को 0 से 100 तक 'री-ऑकरेंस' स्कोर मापा जाता है। स्कोर जितना अधिक होता है, कैंसर की पुनरावृत्ति का खतरा उतना अधिक होता है।

यानी सीधेतौर पर कह सकते हैं कि कीमोथेरेपी दोबारा कैंसर होने के जोखिम को कम करता है। पिछले अध्ययनों से पता चला है कि 10 या उससे कम अंक वाले मरीजों को कीमोथेरेपी की आवश्यकता नहीं थी। वहीं, 25 से अधिक अंकों वाले महिलाओं को इससे फायदा हुआ। नए अध्ययन ने 11 से 25 की मध्यवर्ती सीमा में आने वाली अधिकांश महिलाओं की जांच की।

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