अंबिकापुर । वर्दी का शौक और बस्तर में अमन-चैन के साथ विकास को गति देने का सपना तो पहले से था, लेकिन ऐसा कोई मौका नहीं मिल रहा था, जिससे हम भी अपना योगदान दे सकें। सीआरपीएफ की बस्तरिया बटालियन के गठन को लेकर सीआरपीएफ के अधिकारियों-कर्मचारियों द्वारा जब गांव-गांव में जागरूकता शिविर लगाकर जानकारी देनी शुरू की गई तो उत्साह चार गुना बढ़ गया।

मौका मिलते ही हमने चयन प्रक्रिया में हिस्सा लिया और हमें खुशी है कि एक वर्ष का प्रशिक्षण हमने सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। बस्तरिया बटालियन के पहले बैच का हिस्सा बनने की भी हमें खुशी है।

सीआरपीएफ के 241वीं बस्तरिया बटालियन की महिला सदस्य अनिता वासम व संगीता बघेल ने पूरे उत्साह के साथ कहा कि वे इस बटालियन में शामिल होने की खुशियां मना रही हैं।

वे दोनों बस्तरिया बटालियन के उन 534 सदस्यों में शामिल हैं, जो सोमवार को ग्राम केपी अजिरमा स्थित सीआरपीएफ की ट्रेनिंग सेंटर में आयोजित पासिंग आउट परेड में शामिल थी। इस बटालियन में 189 महिलाएं भी हैं, जो एक वर्ष के कठिन परिश्रम के बाद बस्तर में नक्सलियों से लड़ाई के लिए पूरी तरह से तैयार हो चुकी हैं।

सीआरपीएफ बस्तरिया बटालियन की इन मर्दानियों को बस्तर के भौगोलिक परिस्थितियों का भी पूरा ज्ञान है। स्थानीय होने का फायदा इन्हें नक्सलियों के खिलाफ चलाए जाने वाले आपरेशन में भी मिल सकेगा।उल्लेखनीय है कि सीआरपीएफ की बस्तरिया बटालियन में घोर नक्सल प्रभावित बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर व सुकमा जिले के युवाओं का चयन किया गया है। भर्ती में भी इन्हें कुछ रियायतें दी गई थी।

उंचाई व वजन की शारीरिक मानकों में छूट मिलने का फायदा बस्तर के युवाओं ने उठाया। युवाओं को भर्ती से पहले सीआरपीएफ द्वारा सिविक एक्शन प्रोग्राम के माध्यम से शैक्षणिक व शारीरिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया था। इस बात की जानकारी खुद केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने पासिंग आउट परेड समारोह के दौरान दी।

उन्होंने यहां तक कहा कि जनजातिय समाज देशभक्त है और हर चुनौती का सामना करने तैयार रहता है। यही वजह है कि जब बस्तरिया बटालियन के गठन को मंजूरी दी गई तो इसमें भर्ती की प्रक्रियाओं को सरलीकृत किया गया, ताकि अधिक से अधिक युवा सीआरपीएफ से जुड़कर बस्तर में अमन-चैन के साथ विकास को गति देने में सहभागी बन सकें।

बस्तरिया बटालियन के पहले पासिंग आउट परेड समारोह में शामिल होने का अवसर प्राप्त करने वाले कुछ जवानों से नईदुनिया ने चर्चा भी की। बीजापुर जिले के उल्लूर निवासी महिला जवान अनिता वासम के पिता धर्मेंद्र भी अपनी बेटी को सीआरपीएफ की वर्दी पहने नक्सली मोर्चे पर तैनात होने से पहले आयोजित समारोह में शामिल होने पहुंचे थे।

अनिता वासम 12वीं तक की पढ़ाई की है। यह परिवार बस्तर में शांति के लिए अपने स्तर से योगदान दे रहा है। अनिता का भाई जिला पुलिस बल में सेवारत है। पिता धर्मेंद्र वासम कहते हैं कि बेटी के जज्बे को देखकर उन्होंने सीआरपीएफ में सेवा देने के लिए अपनी सहमति दी थी।

सुकमा जिले की संगीता बघेल का कहना है कि बचपन से ही वर्दी पहनने का शौक था। पुलिस और सशस्त्र बलों के जवानों को जब भी वह वर्दी में देखती उसका भी मन इस क्षेत्र में जाने का करता था। पिछली बार जब भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई तो उसने भी इसमें हिस्सा लिया।

परिवार के सदस्यों का भी पूरा सहयोग मिला। उसे खुशी इस बात की है कि आज वह सीआरपीएफ का अंग बन चुकी है। समारोह में बस्तरिया बटालियन के जवानों के परिजन भी पहुंचे थे।

अपने-अपने परिवार के सदस्यों को सीआरपीएफ की वर्दी पहने देख उनका भी सीना गर्व से चौड़ा हो रहा था। इन युवाओं के अभिभावकों और माता-पिता को अतिथियों ने इस बात के लिए धन्यवाद दिया कि उन्होंने ऐसे बच्चों को जन्म दिया है, जो देश सेवा के लिए समर्पित होकर सीआरपीएफ का हिस्सा बनने स्वप्रेरणा से आगे आए हैं।

उत्साह से लबरेज जवानों ने संजोया यादों को

बस्तरिया बटालियन के पहले पासिंग आउट परेड में जवानों की दृढ़ इच्छाशक्ति व अनुशासन झलक रही थी। उनमें अलग से उत्साह भी था। जब पासिंग आउट परेड समारोह संपन्न हुआ तो उनकी खुशी और बढ़ गई। समूचा परेड मैदान उत्साहित जवानों से भर गया।

कोई सेल्फी लेने में व्यस्त नजर आया तो कई जवान गु्रप फोटो और मैदान में रखे गए अत्याधुनिक हथियारों को साथ लेकर फोटो खिंचाने में भी व्यस्त नजर आए।

एक वर्ष का कठोर प्रशिक्षण पूरा कर लेने के बाद इन जवानों की तैनाती अब बस्तर क्षेत्र में की जाएगी, जो प्रावधान किया गया है, उसके मुताबिक पांच वर्षों तक इन्हें बस्तर क्षेत्र में सेवा देनी होगी, इसके बाद इन्हें देश के किसी भी क्षेत्र में जाकर शौर्य व पराक्रम का प्रदर्शन करने अवसर दिया जाएगा।

सभी की इच्छा बस्तर हो नक्सल मुक्त

बस्तरिया बटालियन में शामिल जवानों में से 40 से अधिक ऐसे हैं,जिन्होंने व परिवार ने प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से नक्सली आतंक झेला है। जब इन परिवार के युवा सीआरपीएफ में शामिल हुए तो परिजनों में चिंता भी थी,लेकिन सोमवार को आयोजित समारोह में केंद्रीय गृहमंत्री व मुख्यमंत्री के उद्बोधन ने इन जवानों के साथ परिजनों का भी हौसला इतना बढ़ाया कि परेड ग्राउंड से सभी बस्तर को नक्सल मुक्त करने का संकल्प लेकर लौटे।

कई जवानों ने सुरक्षागत कारणों से नाम एवं तस्वीरों को सार्वजनिक न करने की गुजारिश की,लेकिन यह विश्वास के साथ कहा कि बस्तर की भौगोलिक परिस्थितियों से वाकिफ हैं और नक्सलियों को उनकी मांद में घुसकर मारने से पीछे नहीं हटेंगे।

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