मुंबई: अब बैंकों को डिफॉल्ट कर्ज का मुद्दा 180 दिन के भीतर सुलझाना होगा। रिजर्व बैंक ने डिफॉल्ट लोन को किस तरह निपटाया जाएगा इसके नए नियम जारी किए हैं। इस कारण इस तरह के लोन को निपटाने के सभी पुराने तरीकों को खत्म कर दिया गया है। बैंक ने फंसे हुए कर्ज के निपटान के लिए दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता के तहत आज एक संशोधित रूपरेखा पेश की। नए दिशानिर्देशों में खराब लोन की जल्द शिनाख्त करने और उसकी सूचना देने से संबंधित स्पष्ट रूपरेखा है। आरबीआई ने अपनी अधिसूचना में कहा कि दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता-2016 के क्रियान्वयन को देखते हुए नयी रूपरेखा पेश करने का फैसला किया गया।

केंद्रीय बैंक ने बैंकों से कहा है कि अगर वो नए नियमों का उल्लघंन करते हैं तो उनको भारी पेनल्टी का सामना कर पड़ सकता है। रिजर्व बैंक के इस कदम से लोन रिस्ट्रक्चरिंग की स्कीम जैसे कॉर्पोरेट डेट रिस्ट्रक्चरिंग (Corporate Debt Restructuring), सस्टेनेबल स्ट्रक्चरिंग स्ट्रेस एसेट (Sustainable Structuring of Stressed Assets), स्ट्रैटेजिक डेट रिस्ट्रक्चरिंग (Strategic Debt Restructuring) जैसे तरीके खत्म हो जाएंगे। खराब कर्ज को ज्वाइंट लेंडर फोरम के जरिए सुलझाने के सिस्टम को भी बंद कर दिया गया है।

रिजर्व बैंक ने डिफॉल्ट की रिपोर्टिंग को भी तिमाही से मासिक कर दिया है। 5 करोड़ रुपए से ज्यादा लोन वाले के डिफॉल्ट को हर हफ्ते बताना होगा। अब बैंकों को बड़े डिफॉल्ट को सुलझाना जरुरी होगा। अगर 180 दिन के भीतर कोई समाधान नहीं निकलता है तो ऐसे लोन अकाउंट को बैंकरप्सी कोर्ट में भेजा जाएगा। 2 हजार करोड़ रुपए से ऊपर के डिफॉल्ट को 1 मार्च से 180 दिन के भीतर सुलझाना होगा। इस तारीख के बाद के डिफॉल्ट को जिस दिन से डिफॉल्ट हुआ है उस दिन से सुलझाना होगा।

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