भोपाल. गुजरात के राज्यपाल ओपी कोहली ने मध्य प्रदेश के राज्यपाल रूप में शपथ ली है। उन्होंने 15 दिन के लिए मध्य प्रदेश के राज्यपाल का चार्ज लिया है। वह स्थायी राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की जगह लेंगे। असल में, आनंदीबेन पटेल 13 दिन के निजी अवकाश पर यूरोप के दौरे पर जा रही हैं। नियमानुसार, 10 दिन से ज्यादा अवकाश लेने पर राज्यपाल को बदले जाता है। शपथ ग्रहण के दौरान मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के अलावा तमाम कैबिनेट मंत्री और विधायक भी मौजूद रहे।

- इसे लेकर सियासी बयानबाजी भी शुरू हो गई है। कांग्रेस का कहना है कि राज्यपाल आनंदीबेन पटेल सरकार पर नकेल कस रही थीं, वह सरकार की योजनाओं की निगरानी कर रही थीं। इसलिए उन्हें छुट्टी पर भेजा गया है। इस आरोप का बीजेपी ने खंडन किया है। उनका कहना है कि वह पारिवारिक अवकाश पर गई हैं, यूरोप में उनकी फैमिली रहती है। यूरोप के दौरे से वह मध्य प्रदेश के लिए कुछ लेकर आएंगी।

सितंबर 2016 में भी ले चुके हैं चार्ज
- इससे पहले भी सितंबर 2016 में ओपी कोहली ने मध्य प्रदेश के 26वें राज्यपाल के रूप में शपथ ली थी। तब भी उन्हें मध्य प्रदेश का कार्यवाहक राज्यपाल बनाया गया था। उन्होंने एमपी के राज्यपाल रामनरेश यादव की जगह ली थी।

एमपी के इतिहास में संभवत: ये पहला मौका
- कोहली के पास पूर्व में भी करीब डेढ़ वर्ष तक (8 सितंबर 2016 से 22 जनवरी 2018 तक) मप्र का प्रभार रहा है। मप्र राजभवन ने इसकी तैयारी कर ली है। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश भी सुबह भोपाल पहुंच जाएंगे। मप्र के इतिहास में यह संभवत: पहला मामला है जब किसी गवर्नर के छुट्टी पर जाने के कारण दूसरे राज्य के गवर्नर द्वारा शपथ ली जाएगी।

3 जून को भोपाल लौटेंगी आनंदी बेन
- आनंदी बेन 3 जून को भोपाल लौटेंगी। इसके बाद दोबारा वो शपथ लेंगी। राजभवन के सूत्रों का कहना है कि मप्र राजभवन ने गवर्नर के अवकाश पर जाने की सूचना राष्ट्रपति को दी। राष्ट्रपति कार्यालय ने गुजरात राजभवन को सूचित किया कि कोहली को प्रभार दिया गया है। कागजी प्रक्रिया में इसे वारंट जारी करना भी कहा जाता है। मप्र में 1966 के बाद अब तक 5 बार बतौर कार्यवाहक गवर्नर का प्रभार दिया गया। इसमें से चार बार न्यायाधीश के पास गवर्नर का प्रभार रहा। पहली बार किसी दूसरे राज्य के गर्वनर को शपथ दिलाई जाएगी।

विदेश