श्रीनगर, राज्य ब्यूरो।ग्रीष्मकालीन राजधानी के कर्णनगर में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच गत सोमवार को शुरु हुई मुठभेड़ बीती रात करीब चार घंटे बंद रहने के बाद मंगलवार की सुबह पुन: शुरु हो गई। इस बीच, शहीद सीआरपीएफ कर्मी मुजाहिद खान का पार्थिव शरीर पूरे राष्ट्रीय सम्मान के साथ हवाई जहाज के जरिए पटना,बिहार भेजा गया। 

गौरतलब है कि गत सोमवार की तड़के स्वचालित हथियारों से लैस दो आतंकियों ने कर्णनगर स्थित सीआरपीएफ की 23वीं वाहिनी मुख्यालय पर हमले का प्रयास किया था। लेकिन सजग संतरी की त्वरित कार्रवाई पर आतंकियों का भागना पड़ा। इसके बाद सुरक्षाबलों ने जब आस-पास के इलाके की तलाशी ली तो वाहिनी मुख्यालय से कुछ ही दूरी पर स्थित एक इमारत में छिपे आतंकियों ने फायरिंग कर दी। इसमें एक जवान शहीद हो गया। अन्य जवानों ने अपनी पोजीशन ली और जवाबी फायर किया। इसके बाद वहां मुठभेड़ शुरु हो गई। 

आज हुमहामा स्थित आरटीसी सीआरपीएफ परिसर में शहीद जवान मुजाहिद खान को अंतिम श्रद्घांजली अर्पित करने व उसके पार्थिव शरीर को पूरे सम्मान के साथ उनके परिजनों के पास भेजे जाने के बाद पत्रकारों से बातचीत में आईजी सीआरपीएफ जुल्फिकार हसन ने  सुबह दोबारा मुठभेड़ शुरु होने की पुष्टिï करते हुए कहा कि जिस इमारत में आतंकी हैं,वहां आस-पास घनी बस्ती है। किसी आम नागरिक को गोली न लगे,इसलिए हम पूरा एहतियात बरत रहे हैं। आतंकियों को मार गिराने का अभियान अंतिम चरण में है। उन्होंने सुरक्षा चूक से इंकार करते हुए कहा कि आतंकी आत्मघाती हमला करने की फिराक में हैं, सभी सुरक्षाबल सतर्क थे और इसी कारण आतंकी कर्णनगर में वाहिनी मुख्यालय में हमला करने में नाकाम रहे। 

इस बीच, कर्णनगर में आतंकियों और लश्कर के आतंकियों के बीच जारी मुठभेड़ बीती रात सवार बारह बजे तक जारी रही। इसके बाद करीब चार घंटे तक दोनों तरफ से गोलीबारी बंद रही और सुबह पौने बजे के करीब दोबारा गोलीबारी शुरु हो गई। आतंकियों को मार गिराने के लिए सुरक्षाबलों ने उनका ठिकाना बनी इमारत पर कई ग्रेनेड और यूबीजीएल ग्रेनेड भी दागे। 

मुठभेड़स्थल पर मौजूद एक अधिकारी ने बताया कि आतंकयिों के भागने के सभी रास्ते गत रोज ही बंद कर दिए गए थे। अंधेरे में किसी तरह का नागरिक नुक्सान न हो,इसलिए हमने अपनी तरफ से गोलीबारी बंद करते हुए घेराबंदी मजबूत कर दी थी। आज सुबह पौने पांच बजे के करीब आतंकियों ने ग्रेनेड फेंकते हुए भागने का प्रयास किया,लेकिन जवानों ने त्वरित कार्रवाई कर उन्हें मुठभेड़ में दोबारा उलझा लिया। आतंकियों को इमारत के एक हिस्से में धकेल दिया गया है और जल्द ही वह मारे जाएंगे। 

श्रीनगर में मंगलवार को भी जवानों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ जारी है। एक इमारत के अंदर दो आतंकी बताए जा रहे हैं, जिन्हे सेना ने चारों ओर से घेर रखा है। अंधेरे का फायदा उठाकर आतंकी भाग ना जाएं, इसलिए रात में फायरिंग रोक दी गई थी। इसके बाद मंगलवार सुबह से ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है। इससे पहले सोमवार को आतंकियों की फायरिंग में बिहार के आरा के रहने वाले सीआरपीएफ कांस्टेबल मोजाहिद खान शहीद हो गए हैं। सीआरपीएफ के आइ जी रविदीप सहाय ने जानकारी दी की 2 आतंकियों ने सुबह सीआरपीएफ मुख्यालय में घुसने की कोशिश की थी। वे मुख्यालय में प्रवेश नहीं कर सके लेकिन मुख्यालय के पास एक इमारत में घुस गए। वहां से 5 परिवारों को निकाल लिया गया है। ऑपरेशन चालू है।

 

श्रीनगर में मंगलवार को भी जवानों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ जारी है। एक इमारत के अंदर दो आतंकी बताए जा रहे हैं, जिन्हे सेना ने चारों ओर से घेर रखा है। अंधेरे का फायदा उठाकर आतंकी भाग ना जाएं, इसलिए रात में फायरिंग रोक दी गई थी। इसके बाद मंगलवार सुबह से ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है। इससे पहले सोमवार को आतंकियों की फायरिंग में बिहार के आरा के रहने वाले सीआरपीएफ कांस्टेबल मोजाहिद खान शहीद हो गए हैं।जम्मू के रायपुर में सुऱक्षा बल का सर्च ऑपरेशन चल रहा है। क्षेत्र की निगरानी के लिए हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किया जा रहा है। सीआरपीएफ के आइ जी रविदीप सहाय ने जानकारी दी की 2 आतंकियों ने सुबह सीआरपीएफ मुख्यालय में घुसने की कोशिश की थी। वे मुख्यालय में प्रवेश नहीं कर सके लेकिन मुख्यालय के पास एक इमारत में घुस गए। वहां से 5 परिवारों को निकाल लिया गया है। ऑपरेशन चालू है।

 सोमवार को करण नगर में सीआरपीएफ कैंप से गोलाबारी की आवाज सुनी गई थी, जिसके बाद सेना ने जवाबी कार्रवाई की। इन आतंकियों को सुबह हथियारों के साथ कैंप के पास देखा गया था। जम्मू और कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में सोमवार की तड़के एक सीआरपीएफ शिविर पर हमले की फिराक में आए आतंकियों को सतर्क जवानों की त्वरित कार्रवाई से जान बचाकर भागना पड़ा था। फिलहाल, पूरे शहर में अलर्ट लगा हुआ है।

 

सीपीआरएफ कैंप के पास सोमवार को 2 हथियारबंद आतंकी देखे गए थे। उन लोगों के पास बैग और AK47s थी। आतंकी सीपीआरएप कैंप की ओर जा रहे थे। जवानों ने उन्हें देखते ही गोलियां चलाई जिसके बाद दोनों आतंकी वहां से भाग गए। आतंकियों की ये नाकाम कोशिश सुबह करीब 4.30 बजे की गई थी। बता दें कि श्रीनगर में बर्फबारी दोबारा शुरू हुई है, जिसका फायदा आतंकी उठाना चाहते हैं। आतंकियों ने हमले के लिए श्रीनगर के कर्णनगर इलाके में स्थित सीआरपीएफ की 23वीं वाहिनी के मुख्यालय को चुना था। संबधित अधिकारियों ने बताया कि आज तड़के करीब साढ़े चार बजे स्वचालित हथियारों से लैस दो आतंकी जिनकी पीठ पर पिटठु बैग भी थे। संतरी ने दो युवकों को जब अंधेरे में शिविर की तरफ आते देखा तो उसे कुछ संदेह हुआ। उसने अपने अन्य साथियों को सचेत करते हुए चेतावनी देते हुए दोनों आतंकियों को रुकने व अपनी पहचान बताने के लिए कहा।

 संतरी द्वारा देख लिए जाने पर दोनों आतंकियों ने वहीं अपनी पोजीशन ले गोली चलाई। लेकिन संतरी ने खुद को बचाते हुए जवाबी फायर किया। अपने मंसूबे को नाकाम होते देख दोनों आतंकी अपनी जान बचाते हुए वहां से भाग निकले। सीआरपीएफ के जवानों ने भाग रहे आतंकियों पर पीछे से भी गोली दागी थी। बताया जाता है कि आतंकियों ने भागने के लिए किसी मोटरसाईकल का इस्तेमाल किया है। गोलियों की आवाज से पूरे कर्णनगर में सनसनी फैल गई। सीआरपीएफ के जवानों ने उसी समय पुलिस के साथ मिलकर पूरे इलाके की घेराबंदी करते हुए तलाशी अभियान चलाया। लेकिन आतंकियों का सुराग नहीं मिला। 

इस घटना के बाद पूरे शहर में अलर्ट घोषित कर दिया गया और शहर में विभिन्न जगहों पर पुलिस व अर्धसैनिकबलों के जवानों ने हिमपात के बावजूद नाके लगा संदिग्ध तत्वों और वाहनों की जांच पड़ताल भी शुरु कर दी। बता दें कि शनिवार की सुबह सेना के कैंप पर आतंकियों ने हमला कर दिया था, जिसका जवानों ने मुहतोड़ जवाब दिया, लेकिन इस हमले में 5 जवान शहीद हो गए, वहीं एक आम नागरिक को भी अपनी जान गंवानी पड़ी है। जम्मू-कश्मीर में सुंजवां आर्मी कैंप को आतंकियों ने निशाना बनाया था। यह हमला शनिवार सुबह करीब पांच बजे हुआ था। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह ऑपरेशन करीब 51 घंटे चला। जवानों ने चार आतंकियों को मार गिराया। फिलहाल सर्च ऑपरेशन जारी है।

 

जैश-ए-मोहम्मद ने ली जिम्मेदारी

यह हमला आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने करवाया था। सुंजवां आतंकी हमले का मास्टरमाइंड रउफ असगर है। रउफ मौलाना जैश-ए-मोहम्मद का चीफ आतंकी मसूद अजहर का भाई है। फरवरी के पहले हफ्ते में रउफ ने भाई मौलाना मसूद अजहर के साथ हिजबुल के चीफ सैयद सलाउद्दीन से मिला था और 9 फरवरी को आतंकी अफजल गुरु की बरसी के दिन दोनों ने हमले को अंजाम देने के लिए मदद मांगी थी।

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