हैदराबाद। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज ने कहा है कि फ्लिपकार्ट की 77 फीसद हिस्सेदारी के अधिग्रहण से वालमार्ट की साख पर सकारात्मक असर पड़ेगा। हालांकि फ्लिपकार्ट अगले कुछ वर्षों तक घाटे में ही बनी रहेगी।

मूडीज ने क्रेडिट आउटलुक रिपोर्ट में कहा है कि इस सौदे से शुरू में वालमार्ट की साख पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। शुद्ध कर्ज के मुकाबले कंपनी का कैश फ्लो अनुपात 40 फीसद से घटकर 30 फीसद से नीचे आ सकता है।

कर्ज के मुकाबले एबिटा (ब्याज, कर, ह्रास व कर्ज अदायगी से पूर्व लाभ) बढ़कर 1.6 गुना हो सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार इस गिरावट के बावजूद अधिग्रहण से कंपनी की साख पर सकारात्मक असर होगा क्योंकि इससे वालमार्ट को भारतीय ई-कॉमर्स सेक्टर में बड़ा बाजार मिल जाएगा।

उम्मीद है कि कैश फ्लो बढ़ने और कर्ज कम होने से कर्ज के मुकाबले नकदी का अनुपात भी सुधरेगा।

ई-कॉमर्स के लिए बने नियामक

इस बीच, ऑल इंडिया ऑनलाइन वेडंर्स एसोसिएशन (एआइओवीए) ने सरकार से मांग की है कि ई-कॉमर्स कंपनियों के कामकाज और इसकी नीतियों पर देखरेख के लिए नियामक नियुक्त किया जाए।

एसोसिएशन ने हाल में फ्लिपकार्ट की 77 फीसद हिस्सेदारी वालमार्ट द्वारा खरीदे जाने की घोषणा के बाद यह मांग की गई है।

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के अलावा दूसरे व्यापारी संगठनों और आरएसएस से संबद्ध संगठन स्वदेशी जागरण मंच ने इस सौदे का विरोध किया है।

एसोसिएशन ने एक बयान में कहा है कि हमने ई-कॉमर्स सेक्टर के लिए नियामक बनाने की मांग 2016 में नीति आयोग में बनी ई-कॉमर्स कमेटी के समक्ष भी की थी। इसके लिए आश्वासन भी दिया गया था।

विदेश