गुरुकुल, भारतीय शिक्षा पद्धति का प्रतीक है। गुरुकुल सतयुग से लेकर  कलियुग तक विद्यमान है। गुरुकुल अर्थात् गुरु का कुल अर्थात् गुरु का कुटुम्ब या गुरु का परिवार । जब बच्चा अपने अभिभावक का घर छोड़कर गुरु के घर रहने  और  शिक्षा ग्रहण करने  चला जाता है । जहां  वह बच्चा  जाता है , उसे गुरुकुल कहा जाता है।

गुरुकुल की परपंरा युगों पुरानी है। त्रेतायुग में श्रीराम, द्वापरयुग में श्रीकृष्ण ने गुरुकुल में रहकर शिक्षा ग्रहण की थी। गुरुकुल एक ऐसा वातावरण तैयार करता है जिसमें बच्चा खेलता भी है और सीखता भी है। जीवन की छोटी-छोटी बातों को सीखता भी है। गुरुकुल में बच्चा एक नए अभिभावक को पाता है। माता-पिता के छोड़कर गुरुकुल जाने वाले बच्चों में सदा इस बात की ललक रहती है कि कैसे मस्ती के बहाने ढूंढे जाए लेकिन गुरुकुल का दूसरा नाम ही अनुशासन है।

गुरुकुल को जीवन जीने की कला कहा जाए तो सच्चे अर्थों में सही होगा। गुरुकुल कोई विद्यालय नहीं होता है बल्कि यह तो अपने जीवन को कैसे आयामित करना है यह सिखाने की पाठशाला है। यहां कोई किताबी ज्ञान नहीं दिया जाता है क्योंकि यहां किताबें मायने नहीं रखती बल्कि उनका सार ही महत्वपूर्ण होता है। वेद, उपनिषद्, जैसे महान कृतियों से अवगत कराया जाता है ताकि बच्चे भारतीय ज्ञान परपंरा से अवगत रहे हैं। वो ज्ञान परपंरा जिसे हमारे ऋषि-मुनियों ने कई वर्षों की तपस्या से संजोकर रखा है।

गुरुकुल में शिक्षा का मतलब वेद और उपनिषद् ही बल्कि उन्हें गणित, ज्योतिष, भूगोल, भाषाविज्ञान जैसे विषयों का ज्ञान कराना है। गुरुकुल में मूल रूप से शिक्षा पद्धति को दो भागों में बांटा गया है पहला शास्त्र ज्ञान और दूसरा शस्त्र ज्ञान। गुरुकुलों ने समय के अनुसार अपने आप को ढ़ालना सीख लिया है। पहले जहां केवल सीमित विषयों का ज्ञान दिया जाता था वही आज अंग्रेजी, विज्ञान, गणित ज्योतिष जैसे विषयों का अध्ययन-अध्यापन का कार्य किया जाता है। आजकल के लोगों के मन भ्रांति है कि गुरुकुल में केवल संस्कृत नीत विषयों को पढ़ाया जाता है और बच्चों को वेदपाठी बना दिया जाता है।

मेरा यह निजी अनुभव रहा है कि गुरुकुल में संस्कृत ही नहीं अंग्रेजी, हिन्दी, स्थानीय भाषाओं के अलावा विदेशी भाषाओं को भी सिखाया जाता है। इन गुरुकुलों में बच्चों को उच्च श्रेणी का ज्ञान दिया जाता है जहां अनुशासन में रहना सिखाया जाता है। नैतिक शिक्षा जैसे विषय पर ध्यान दिया जाता है जिससे बच्चे पारिवारिक मूल्यों को समझ सके और व्यक्ति व्यवहार कैसे करना है? इसका ज्ञान भी हो जाए। इन सभी के अलावा भारतीय गणित जिसे हम वैदिक गणित का ज्ञान भी दिया जाता है। वैदिक गणित कोई साधारण विषय नहीं बल्कि यह तो गणित को साधारण करने वाला विषय है।

मन को स्थिर रखने के लिए योग, प्राणायाम, व्यायाम , ध्यान आदि का सहारा लिया जाता है। यदि मन स्थिर नहीं रहेगा तो फिर कैसे इंसान बाकी कार्यों पर ध्यान लगा सकता है। गुरुकुल परंपरा में शस्त्र विद्या भी सिखाई जाती है। पहले जब राजा के पुत्र गुरुकुलों में पढ़ने जाया करते थे तो उन्हें केवल शास्त्र का ज्ञान नहीं दिया जाता है बल्कि उन्हें शस्त्र का ज्ञान भी दिया जाता था। इस शस्त्र ज्ञान में उन्हें धनुष-बाण चलाना, भाला-बरछा चलाना, तलवार चलाना जैसे शस्त्रों से अवगत कराया जाता था। शारीरिक शिक्षा भी दी जाती थी। जिसमें सूर्य नमस्कार, शरीर सौष्ठव, कुश्ती की शिक्षा दी जाती थी। प्राचीन काल के गुरुकुलों में मल्लयुद्ध की कला सिखाई जाती है।

आधुनिक गुरुकुलों में शस्त्र विद्या की जगह शारीरिक शिक्षा ने ले ली है लेकिन किसी-किसी गुरुकुलों में आजकल शस्त्र विद्या का ज्ञान दिया जाता है। लाठी चलाना, तलवार चलाना, भाला चलाना आदि शस्त्र विद्या दी जाती है। इन शस्त्रों के अलावा कुश्ती, मार्शल आर्ट, भारतीय खेलों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके अलावा भारत की प्राचीन मार्शल आर्ट जैसे केरल के कलियारीपयाट्टू को कही हद बचाने का श्रेय गुरुकुल को ही जाता है। गुरुकुल केवल एक विद्यालय ही नहीं है बल्कि यह जीवन निर्माण करने वाली संस्था है। गुरुकुल में भगवान श्रीकृष्ण ने 64 विद्या और 16 कलाओं की शिक्षा मात्र 64 दिनों में पूरा कर लिया था।

प्राचीन काल के गुरुकुलों में शिक्षक दो प्रकार के होते थे, पहले जो शास्त्र का ज्ञान देते थे और दूसरे जो शस्त्र का ज्ञान देते थे। आज के गुरुकुल आधुनिक हो गए हैं। आज प्रत्येक विषय के लिए अलग से शिक्षकों को अध्यापन कार्य के लिए रखा जाता है। आज का युग  तकनीकी का युग है। इसी तकनीकी युग में गुरुकुल भी तकनीकी हो गए हैं। गुरुकुलों में आज कम्प्यूटर ज्ञान दिया जाता है। इसी कारण गुरुकुल जीवित है क्योंकि गुरुकुलों ने समय के साथ बदलना सीख लिया है। भारत में ऐसे कई गुरुकुल है जो भारतीय ज्ञान परपंरा को आगे बढ़ाने में तत्पर हैं जिनमें हेमाचंद्राचार्य संस्कृत पाठशाला, ऋषि सांदीपनि वेद प्रतिष्ठा संस्थान, मैत्रेयी गुरुकुल, वीर लोंकाशाह संस्कृत ज्ञानपीठ जोधपुर आदि है।

भारत में आज भी ज्ञान परपंरा गुरुकुलों की वजह से बची हुई है क्योंकि यह हमारी शान हैं।

(लेख: विनय कुशवाहा)

स्त्रोत: vinayswachhand.blogspot.com

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