इन्फोसिस के स्वतंत्र निदेशक रवि वेंकटेशन ने इस्तीफ़ा दे दिया है. माइक्रोसॉफ़्ट इंडिया के पूर्व चेयरमैन वेंकटेशन ने 2011 में इन्फोसिस ज्वाइन की थी.

वेंकटेशन के इस्तीफ़े की अटकलें उसी समय से लगाई जा रही थीं जब पिछले साल विशाल सिक्का ने इन्फोसिस के सीईओ (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) का पद छोड़ा था. सिक्का के इस्तीफ़े के बाद इन्फोसिस की कमान एक बार फिर कंपनी के सह-संस्थापक नंदन निलेकणि के हाथ में आ गई थी. उसी समय कंपनी बोर्ड के चार सदस्यों ने इस्तीफ़े दिए थे. इनमें सिक्का के अलावा तत्कालीन चेयरमैन आर शेषशायी भी शामिल थे. तभी वेंकटेशन सह-अध्यक्ष के पद से इस्तीफ़ा दिया था लेकिन वे बोर्ड में बने रहे थे.

कॉरपोरेट जगत के एक विश्लेषक नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं, ‘वेंकटेशन का इस्तीफ़ा होना ही था. इन्फोसिस के पुराने बोर्ड को बदले जाने की प्रक्रिया में यह अपेक्षित था.’ हालांकि कुछ अन्य लोगों का मानना है कि वेंकटेशन को इस्तीफ़ा इसलिए देना पड़ा क्योंकि वे अब भी पूर्व सीईओ सिक्का की नीतियाें का समर्थन कर रहे थे. सिक्का सेवा और उत्पाद दोनों उपलब्ध कराने की नीति पर चल रहे थे जबकि मौज़ूदा सीईओ सलिल पारिख सिर्फ़ सेवा देने की रणनीति अपना रहे हैं. इससे वेंकटेशन का तालमेल नहीं बैठ पा रहा था.

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