अमेरिकी खुदरा क्षेत्र की बड़ी कंपनी वॉलमार्ट ने भारतीय स्टार्टअप कंपनी फ्लिकार्ट को खरीदकर जो धमाका किया है, उसकी गूंज वित्तीय जगत में दूर तक सुनाई दे रही है। वॉलमार्ट ने 16 अरब डॉलर यानी 1.12 लाख करोड़ रुपये में फ्लिपकार्ट के 77 फीसदी शेयर खरीदने का जो सौदा किया है, वह पूरी दुनिया में अब तक का सबसे बड़ा ई-कॉमर्स सौदा है। मगर इससे बड़ी बात यह है कि जिस स्टार्टअप कंपनी फ्लिपकार्ट पर उसने नियंत्रण हासिल किया है, वह भारत के प्रतिभाशाली युवकों द्वारा लिखी गई कामयाबी की सबसे चमकदार कहानियों में गिनी जाती रही है। आईआईटी, दिल्ली से निकले दो युवा इंजीनियरों ने 11 साल पहले जब एक छोटे से दफ्तर से इस कंपनी की शुरुआत की थी, तब वे उम्र के ढाई दशक भी ठीक से पार नहीं कर पाए थे। बावजूद इसके, इन लोगों ने ई-कॉमर्स के भारतीय बाजार में फ्लिपकार्ट को जो स्थान दिला दिया, उसकी झलक इस तथ्य में मिलती है कि इसका अधिग्रहण करने और इस पर पूरी तरह से अपना नियंत्रण स्थापित कर लेने के बाद भी वॉलमार्ट ने फैसला किया है कि वह न केवल इसे एक अलग ब्रैंड के रूप में कायम रखेगी, बल्कि इसकी स्वतंत्र संचालन प्रक्रिया भी बनाए रखेगी। हालांकि जैसे हर बड़े सौदे के साथ कुछ न कुछ जोखिम जुड़ा रहता है। वैसे ही इस महंगे सौदे को लेकर भी कुछ आशंकाएं जताई जा रही हैं। इन्हीं आशंकाओं के चलते सौदे की खबर आने के बाद वॉलमार्ट के शेयरों में गिरावट देखने को मिली। बावजूद इसके वॉलमार्ट इस सौदे को अपनी उपलब्धि मान रही है। यह स्वाभाविक भी है। गौर करने की बात है कि वॉलमार्ट की प्रतिद्वंद्वी कंपनी ऐमज़ॉन भी फ्लिपकार्ट को खरीदने की कोशिशों में लगी थी। दोनों इस कंपनी के जरिए भारतीय बाजारों पर कब्जा करने की होड़ में लगी थीं। इस मोर्चे पर भले वॉलमार्ट ने बाजी मार ली हो, लेकिन यहां उनकी यह प्रतिस्पर्धा रुकने वाली नहीं है। ऐमज़ॉन इतनी आसानी से वॉलमार्ट को भारतीय बाजारों पर कब्जा नहीं करने देगी। इस होड़ का आखिरी नतीजा दोनों में से जिसके भी पक्ष में हो, इसने भारतीय बाजार के आकर्षण और यहां के मध्य वर्ग की हैसियत को एक बार फिर रेखांकित कर दिया है। हमें अपनी इस ताकत को ठीक से समझने और इसका समुचित इस्तेमाल करने की जरूरत है। देश में खुदरा बाजार में विदेशी निवेश को सौ फीसदी प्रतिनिधित्व की अनुमति नहीं है। इसलिए कांग्रेसनीत संप्रग सरकार के कार्यकाल में खुदरा बाजार में विदेशी निवेश को अनुमति देने के प्रयास को विरोध भाजपा ने किया था। किंतु, अब ऑनलाइन बाजार के माध्यम से वॉलमार्ट ने देश के खुदरा बाजार में प्रवेश किया है। इसका भारतीय खुदरा बाजार पर क्या असर आएगा, इसका आकलन भी जानकार लोग कर रहे हैं। स्वदेशी जागरण मंच ने इस सौदे पर आपत्ति दर्ज कराई है। ऑनलाइन बाजार में निवेश की कोई नीति नहीं होने से सरकार भी इस संबंध में कोई हस्तक्षेप नहीं कर पा रही है। बहरहाल, इस सौदे के बाद ऑनलाइन बाजार को लेकर नीति बनाने की आवश्यकता है। 

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