इलेक्ट्रिक कारें पर्यावरण के लिए तो अच्छी होती ही हैं, साथ ही इसमें ईधन की खपत भी कम होती है। 12 वोल्ट पावर वाली बैट्री पिछले सात दशक से कारों के लिए स्टैंडर्ड बनी हुई है, लेकिन अब कारों में विद्युत उपकरण की मांग  बढ़ रही है। इसलिए भविष्य में आने वाली कारों के लिए 48 वोल्ट सिस्टम नया स्टैंडर्ड बन सकता है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कार कंपनियां 12 वोल्ट सिस्टम को छोड़ना चाहती हैं और 48 वोल्ट सिस्टम को अपनाना चाहती हैं। 12 वोल्ट सिस्टम का 1950 के दशक से कारों में इस्तेमाल हो रहा है। 

डेल्फी टेक्नोलॉजी के एक अधिकारी ने कहा, 'नए 48-वोल्ट सिस्टम के कई फायदे हैं। इससे 15 फीसदी तक ईधन की बचत होती है। इस सिस्टम को किसी एक कार में जोड़ने में 650 डॉलर से 1,000 डॉलर के बीच खर्च आएगा।'

इंड्रस्ट्री एक्सपर्ट के मुताबिक, आने वाले दशक में 48 वोल्ट सिस्टम वाली कारों की ब्रिकी तेजी से बढ़ेगी और 2025 तक पूरे विश्व में 48 वोल्ट सिस्टम वाली कारों की करीब 14 फीसदी होगी। इसके अलावा गैसोलीन या डीजल इंजन से चलने वाली कारों की बिक्री में 65 फीसदी की गिरावट आएगी।

पहले भी कारों में वोल्ट की क्षमता बढ़ाई गई थी, लेकिन कीमत ज्यादा होने से यह सफल नहीं हो पाया था, लेकिन अब समय के साथ परिस्थितियां बदल गई हैं और कारों में पावरफुल बैट्री की मांग भी बढ़ गई है। और दूसरी बात, बैट्रियों के दाम पहले आज के मुकाबले अधिक थे। 

ऑडी 2019 में 48 वोल्ट क्षमता वाली ए7 और ए8 कारें ला रही है। इसके अलावा वोल्वो भी 48 वोल्ट स्टैंडर्ड को अपना चुकी है। अब 48 वोल्ट सिस्टम आने वाली कारों के लिए नया स्टैंडर्ड बन सकता है।

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