राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के बेबुनियाद वक्तव्य को लेकर आपत्ति दर्ज कराई है। संघ के सह-सरकार्यवाह डॉ. मनमोहन वैद्य ने वक्तव्य जारी कर कहा है कि कांग्रेस और उसके अध्यक्ष राहुल गांधी 'घिनौनी राजनीतिÓ कर रहे हैं। संघ झूठ के आधार पर चलने वाली उनकी घिनौनी राजनीति की भत्र्सना करता है। दरअसल, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने अधिकृत फेसबुक पेज पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत और सह-सरकार्यवाह डॉ. मनमोहन वैद्य के संबंध में झूठी बातें लिखी हैं। अपनी पोस्ट में राहुल गांधी ने बताया है कि यह लोग अनुसूचित जाति-जनजातियों को संविधान में दिए गए आरक्षण को ख़त्म करना चाहते हैं। राहुल गांधी के इस पोस्ट पर संघ ने उचित ही संज्ञान लिया है। यह सरासर झूठ है। संघ के सरसंघचालक या किसी भी अन्य शीर्ष अधिकारी ने कभी भी आरक्षण को समाप्त करने की बात नहीं की है। संघ तो आरक्षण को जारी रखने के पक्ष में है। संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभाओं में समय-समय पर आरक्षण के समर्थन में संकल्प पारित किए गए हैं। इसलिए यह कहना कि संघ अनुसूचित जाति-जनजातियों का आरक्षण समाप्त करना चाहता है, निराधार है। अपितु, संघ तो यही कहता है कि जब तक समाज में भेदभाव है, जाति के आधार पर असमानता है, तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिए। यहाँ यह भी विचार करना चाहिए कि संघ पर लगाए अपने आरोपों के संदर्भ में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कोई तथ्य और तर्क प्रस्तुत नहीं किया है। उन्होंने अपने फेसबुक पेज और ट्वीटर हैंडल पर लगभग दो मिनट का एक वीडियो जरूर जारी किया है। इसमें 2016 में गुजरात के उना में दलितों के साथ हुई मारपीट की घटना की क्लिप और मध्यप्रदेश में पुलिस भर्ती परीक्षा के दौरान कुछ उम्मीदवारों के सीने पर एससी-एसटी लिखे जाने की घटना का उल्लेख है। वीडियो में यह आरोप लगाया है कि आरएसएस और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के उकसावे पर यह घटनाएं हो रही हैं। किंतु यह भी बिना प्रमाण के कहा गया है। अपनी राजनीतिक दुकान को बचाने के लिए राहुल गांधी अब झूठ का सहारा ले रहे हैं। वह यह भी समझ गए हैं कि अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग कांग्रेस के हाथ से छिटक गया है। अब यह वर्ग भाजपा और मोदी के पाले में पहुँच गया है। उसे वापस लाने के लिए ही राहुल गांधी आजकल हर हथकंडा अपना रहे हैं। वह अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रति नफरत की भावना को जन्म देने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि यह वर्ग मोदी के विरोध में खड़ा हो जाए और कांग्रेस उसका लाभ उठा सके। इस प्रयास में वह सफेद झूठ बोलने में भी कोई संकोच नहीं कर रहे। भले ही उनके झूठ का खामियाजा समाज को भुगतना पड़ रहा हो। दो अप्रैल को देश के विभिन्न हिस्सों में ऐसे ही झूठ का नुकसान संपूर्ण हिंदू समाज को उठाना पड़ा। एससी-एसटी एक्ट में बदलाव पर राहुल गांधी ने अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के गुस्से को और अधिक भड़काने के लिए साफ झूठ बोला था। भाजपा एवं मोदी सरकार को 'दलित विरोधीÓ बताने के लिए वह यह कहने से भी नहीं चूके कि एससी-एसटी एक्ट को हटा दिया गया है। राष्ट्रीय नेता द्वारा अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा और लाभ के लिए इस प्रकार के झूठ बोलना घिनौनी राजनीति ही है। राहुल गांधी अब कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, इसलिए उन्हें अब परिपक्वता दिखानी चाहिए। सोच-विचार कर बोलना चाहिए। इस प्रकार के झूठे आरोप लगाना ठीक बात नहीं, क्योंकि आरक्षण का विषय बहुत ही संवेदनशील है। बड़े नेता संवेदनशील मुद्दों पर झूठ नहीं बोलते।

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