चंडीगढ़। महाशिवरात्रि का महोत्सव इस बार भौम तिथि प्रदोष के शुभ संयोग में मनाया जाएगा। वैसे तो महाशिवरात्रि में शिव आराधना का मुहूर्त आठों प्रहर चौबीस घंटे रहता है, लेकिन कुछ खास समय पर पूजा का एक अलग महत्व होता है और मान्यता है कि शुभ समय में की गई आराधना का फल जल्दी मिलता है तथा मनोकामनाएं शीघ्रता से पूरी होती है। अब हम आपको बताते हैं महाशिवरात्रि के मुहूर्त और पूजा विधान के समय के बारे में।

महाशिवरात्रि पर्व 13 फरवरी को है। जानकारों के अनुसार, शिवरात्रि सदैव अर्द्ध रात्रि को ही मानी जाती है। इस बार 12 फरवरी को रात 8:07 बजे से त्रयोदशी यानी प्रदोष लग रहा है, जो 13 फरवरी को रात 10:38 बजे तक रहेगा। ऐसे में 13 फरवरी को महाशिवरात्रि श्रवण नक्षत्र और सिद्ध योग में होगी। इसके चलते यह सवार्थ सिद्धि योग बन रहा है।

शिवरात्रि अगर रविवार या मंगलवार को होती है तो उसे सर्वोत्तम माना जाता है। इस साल 13 फरवरी को मंगलवार पड़ रहा है। वैसे शिवरात्रि फाल्गुन कृष्ण पक्ष में चतुर्दशी को मनाई जाती है। चतुर्दशी मंगलवार 22:36 से प्रारंभ होगी, जो 15 फरवरी 2018, 00:48 बजे खत्म होगी। इस दिन शिवरात्रि में निशिथ काल की पूजा का समय 24:09 से 25:01 तक होगा।

यदि शिवरात्रि में चतुर्दशी तिथि रात्रि को अष्टम मुहूर्त में आ जाती है तो शिवरात्रि का व्रत उसी तिथि में होता है। 13 फरवरी की रात 11 बजकर 46 मिनट से अष्टम मुहूर्त प्रारंभ रहेगा, जो पूरी रात रहेगा। 14 फरवरी को रात 12 बजकर 46 मिनट के बाद अष्टम मुहूर्त मिलता है, इसलिए महाशिवरात्रि का पर्व 13 फरवरी को ही होगा और व्रत भी इसी दिन रखा जाएगा।

इन चार प्रहर की होगी पूजा

1. रात्रि के पहले प्रहर की पूजा का समय शाम 18:05 से 21:20 तक।

2. रात के दूसरे प्रहर में पूजा का समय रात 21:20 से 00:35 तक।

3. तीसरे प्रहर की पूजा का समय 00:35 से 03:49 तक

4. चौथे प्रहर की पूजा का समय 03:49 से 07:04 तक रहेगा।

साल भर में 12 शिवरात्रियां आती है, लेकिन इन सभी में फाल्गुन माह की शिवरात्रि को सबसे प्रमुख और महत्वपूर्ण माना जाता है। इस त्यौहार पर महिलाएं और लड़कियां विशेष कामना से व्रत रखती हैं।

इस व्रत के प्रभाव से कुंवारी लड़कियों को मनचाहा वर प्राप्त होता है और जिन महिलाओं का विवाह हो चुका है, वे सौभाग्यशालिनी बनी रहती हैं। वहीं इस व्रत को रखने से मनोकामनाएं भी पूरी हो जाती हैं, जैसे- अविवाहितों की शीघ्र शादी होती है, सुहागिनों का सौभाग्य अखंड रहता है, दांपत्य जीवन में प्रेम की प्रगाढ़ता और सामंजस्य बना रहता है, संतान सुख मिलता है, धन, धान्य, यश, सुख, समृद्धि, वैभव, ऐश्वर्य में वृद्धि होती है, आरोग्य वरदान मिलता है। नौकरी व करियर में मनचाही सफलता मिलती है। शत्रुओं का विनाश होता है। बाहरी भूत, प्रेत बाधा आदि से चमत्कारी ढंग से रक्षा होती है, आत्मविश्वास और पराक्रम में वृद्धि होती है और आभामंडल में चमत्कारी चमक आती है।

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