मल्टीमीडिया डेस्क। वैसे तो हर पूर्णिमा अपने आप में अहम होती है, लेकिन वैशाख पूर्णिमा का विशेष महत्व है, खासतौर पर बौद्ध धर्म के अनुयाइयों के लिए। बुद्ध पूर्णिमा के दिन ही भगवान बुद्ध का जन्म हुआ, इसी दिन उन्हें बोधगया में ज्ञान की प्राप्ति हुई और इस दिन उनका महापरिनिर्वाण हुआ।

सत्य विनायक पूर्णिमा

वैशाख पूर्णिमा को 'सत्य विनायक पूर्णिमा' के तौर पर भी मनाया जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, श्रीकृष्ण से मिलने पहुंचे उनके मित्र सुदामा की दरिद्रता देखकर भगवान से रहा नहीं गया। उन्होंने सुदामा को सत्य विनायक व्रत करने को कहा, जिसके प्रभाव से उनकी दरिद्रता समाप्त हो गई। इस दिन 'धर्मराज' की पूजा का भी विधान है। धर्मराज की इस दिन पूजा-उपासना से साधक को अकाल मृत्यु का भय नहीं सताता है।

बुद्ध पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त 29 अप्रैल सुबह 6:37 बजे से 30 अप्रैल को 6:27 बजे तक रहेगा। हिंदू धर्म में हर त्योहार उदिया तिथि के अनुसार मनाया जाता है, लिहाजा बुद्ध पूर्णिमा भी 30 अप्रैल सोमवार को मनाई जाएगी।

विदेशों में भी बुद्ध पूर्णिमा

बुद्ध पूर्णिमा भारत के अलावा श्रीलंका, कंबोडिया, वियतनाम, चीन, नेपाल, थाईलैंड, मलयेशिया, म्यांमार, इंडोनेशिया जैसे देशों में धूम-धाम से मनाई जाती है। बुद्ध पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान का भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन स्नान करने से व्यक्ति के पिछले कई जन्मों के पापों से मुक्ति मिल जाती है।

यह स्नान लाभ की दृष्टि से अंतिम पर्व माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, महात्मा बुद्ध को भगवान विष्णु का अवतार माना गया है। इस दिन लोग व्रत-उपवास करते हैं। बौद्ध और हिंदू दोनों ही धर्मों के लोग बुद्ध पूर्णिमा को श्रद्धा के साथ मनाते हैं। बुद्ध पूर्णिमा का पर्व बुद्ध के आदर्शों और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

वर्तमान में जियो

महात्मा बुद्ध ने हमेशा मनुष्य को वर्तमान क्षण में जीने की सलाह दी। उन्होंने कहा जो हो गया उसे बदला नहीं जा सकता है, इसलिए अतीत का दुख न करो। भविष्य की चिंता न करो और वर्तमान क्षण में जीवन का आनंद लो।बुद्ध का एक मूल सवाल है, जीवन का सत्य क्या है? भविष्य को हम जानते नहीं है। अतीत पर या तो हम गर्व करते हैं या उसे याद करके पछताते हैं। भविष्य की चिंता में डूबे रहते हैं। दोनों ही स्थितियां दुखदायी हैं।

यह संदेश दिए आमजन को

एक दीपक की लौ से हम हजारों दीपक जला सकते हैं फिर भी दीपक की रोशनी कम नहीं होती है। इसलिए अपने जीवन को दीपक बनाएं और सभी को खुशियां बांटे।

बुराई से बुराई को खत्म नहीं किया जा सकता। किसी की बुराई करने से प्रेम में कमी आती है, इसलिए दूसरों की बुराई करने से बचो।

भगवान बुद्ध ने सुखी जीवन जीने का सबसे सरल रास्ता बताया है। जो हो गया उसे भूल जाओ, भविष्य के सपने मत देखो, वर्तमान समय पर ही ध्यान लगाओ।

कभी भी क्रोध न करें क्योंकि क्रोध की सजा नहीं मिलती हैं बल्कि क्रोध से सजा मिलती है। इसलिए अपने जीवन से क्रोध का त्याग करें, जीवन सुखमय बनेगा।

किसी दूसरों पर विजय प्राप्त करने से पहले अपने ऊपर विजय प्राप्त करें। खुद पर विजय प्राप्ति के बाद हमेशा जीत आपकी ही होगी।

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