राफेल विमान सौदे पर कांग्रेस केंद्र सरकार को घेरने के प्रयास कर रही है। कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी और दूसरे बड़े नेताओं ने राफेल विमान सौदे में घोटाले की आशंका जता कर सीधेतौर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि सरकार जिस तरह से विमानों की कीमतों पर चुप्पी साधे हुए है, उससे संदेह गहरा रहा है। कांग्रेस ने जो आरोप लगाए हैं, उनमें कहा है कि विमान के खरीद मूल्य में पूरी तरह से अपारदर्शिता रही, रक्षा खरीद प्रक्रिया के अनिवार्य प्रावधानों का उल्लंघन किया गया और कैबिनेट की सुरक्षा मामलों की समिति से पूर्व अनुमति नहीं ली गई। कांग्रेस चाहती है कि राफेल विमान सौदे से जुड़ी जानकारियां सार्वजनिक की जाएं। यह पूरा मामला राजनीतिक लाभ लेने का है। क्योंकि कांग्रेस को भी पता है कि तकनीकी कारणों से सरकार इस सौदे की जानकारी सार्वजनिक कर नहीं सकती। इस संदर्भ में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन ने राज्यसभा में दिए गए एक लिखित जवाब में कहा कि इस सौदे को लेकर भारत और फ्रांस के बीच हुए अनुबंध में यह निश्चित हुआ है कि इस सौदे में सूचनाओं और वस्तुओं के आदान-प्रदान का मामला 2008 में दोनों देशों के बीच हुए रक्षा समझौते के अंदर आता है, जिसके मुताबिक इससे जुड़ीं जानकारियां सार्वजनिक नहीं की जा सकतीं। ऐसा नहीं है कि कांग्रेस को रक्षा सौदों से जुड़ी संवेदनशीलता का अंदाजा नहीं है। बल्कि, वह भली प्रकार जानती है कि रक्षा सौदों में अनेक प्रकार की सावधानी बरती जाती है। कांग्रेस की सरकार के समय जब प्रणब मुखर्जी रक्षा मंत्री थे, तब उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर अमेरिका से हथियार खरीद की जानकारी सार्वजनिक नहीं की थी। इसी प्रकार पूर्व रक्षामंत्री एके एंटनी ने भी इजरायल से हथियार खरीद की जानकारी नहीं दी थी। वित्तमंत्री अरुण जेटली ने संसद में इन दोनों मामलों का जिक्र किया है और उन्होंने राहुल गांधी सहित कांग्रेस से आग्रह किया है कि राष्ट्रीय हित पर राजनीति न की जाए। यह ध्यान देने की बात है कि इस प्रकार के रक्षा सौदों की जानकारी पहले भी नहीं दी जाती रही है, तो फिर अब कांग्रेस क्यों चाह रही है कि जानकारी सार्वजनिक हों। दरअसल, इस समय एक बार फिर बोफोर्स का जिन्न बोतल से बाहर आ रहा है। बोफोर्स तोप घोटाला कांग्रेस के दामन पर एक बड़ा धब्बा है। चार फरवरी को सीबीआई ने दिल्ली की एक अदालत में अर्जी दाखिल कर 64 करोड़ रुपए के बोफोर्स घोटाले में आगे की जांच के लिए अनुमति मांगी है। एजेंसी ने कहा कि उसे नई सामग्री और साक्ष्य मिले हैं, जिनके आधार पर वह आगे जांच करना चाहती है। यदि बोफोर्स फिर से चर्चा में आता है, तो कांग्रेस के सामने मुसीबत खड़ी हो जाएंगी। संभवत: यही कारण है कि कांग्रेस जाँच रुकवाने के लिए सरकार पर दबाव बनाने का प्रयास कर रही है। यदि कांग्रेस की यह नीति है, तब निश्चित ही वह बहुत ही गलत रास्ते पर है। अपने दाग छिपाने के लिए राष्ट्रहित को दांव पर लगाकर दूसरे की कमीज को मैला दिखाने का प्रयास नहीं करना चाहिए। मोदी सरकार की चार साल की सबसे बड़ी उपलब्धि यही है कि इस सरकार पर किसी प्रकार के घोटाले/भ्रष्टाचार का आरोप नहीं है।

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