शीतला कॉलोनी निवासी मुन्नी के पेट में दर्द होने पर शुक्रवार सुबह 10.12 बजे जिला नागरिक अस्पताल लाया गया। मूलरूप से मध्यप्रदेश की रहने वाली मरीज का पति बबलू ने ओपीडी कार्ड के लिए रजिस्ट्रेशन कराया। ओपीडी में दिखाने के बाद डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड के लिए कहा। जब अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराने पहुंचे तो आधार कार्ड मांगा गया। आधार कार्ड न होने पर अल्ट्रासाउंड से मना कर दिया। इसके बाद परिजन गर्भवती महिला को भर्ती कराने के लिए प्रथम तल पर गए, जहां स्टाफ नर्स ने आधार कार्ड के अभाव में भर्ती करने और भर्ती फाइल बनाने से इनकार कर दिया। परिजनों और मरीज के चक्कर काटने के सवा घंटे बाद भी मरीज को भर्ती नहीं किया गया। परेशान होकर परिजन निजी अस्पताल जाने के लिए निकले। उसी वक्त इमरजेंसी से निकलने के बाद गेट पर प्रसव हो गया। अस्पताल परिसर में मौजूद महिलाओं ने डिलीवरी में मदद की। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने मरीज को प्रथम तल पर भर्ती किया।

जांच में गलती मिली

जिला नागरिक अस्पताल प्रबंधन ने मामले को गंभीरता से लिया है। प्राथमिक जांच में डॉक्टर और स्टाफ नर्स दोनों की गलती पाई गई है। सीएमओ ने दोनों कर्मचारियों को निलंबित करने की सिफारिश की।

एंबुलेंस आधे घंटे बाद पहुंची

मरीज को दर्द होने पर परिजनों ने जिला नागरिक अस्पताल में फोन किया। एंबुलेंस कंट्रोल रूम में करीब 9.03 बजे फोन किया गया, लेकिन करीब 30 मिनट के बाद एंबुलेंस मरीज को लेने घर पहुंची। इसके करीब आधे घंटे बाद मरीज को अस्पताल लाया जा सका।

अस्पताल ने रखा पक्ष

अस्पताल के पीएमओ डॉ. प्रदीप शर्मा ने कहा कि लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई कर दी गई है। डिलीवरी से पहले ही अस्पताल प्रबंधन के संज्ञान में मामला आ गया था। मरीज और परिजनों से डिलीवरी कराने की बात कही गई, लेकिन परिजनों ने मना कर दिया और अस्पताल से जाने लगे। गेट पर डिलीवरी होने के बाद मरीज को अस्पताल में भर्ती किया गया।

कब क्या हुआ?

9.03 बजे : शुक्रवार सुबह एंबुलेंस को फोन किया

9. 32 बजे : एंबुलेंस मरीज के घर पहुंची

10.12 बजे : जिला नागरिक अस्पताल लाया गया

10.50 बजे : अस्पताल में डॉक्टर को दिखाया

11.10 बजे : अल्ट्रासाउंड से इनकार किया

11.18 बजे : मरीज को अस्पताल में भर्ती करने से मना किया

11.35 बजे : महिला ने गेट पर बेटी को जन्म दिया

11.42 बजे : अस्पताल प्रबंधन ने महिला को भर्ती किया

अस्पताल में मरीज के भर्ती न किए जाने का मामला चिंताजनक है। घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है। मरीजों को यदि कोई दिक्कत हो तो अस्पताल से जाने के बजाए उच्च अधिकारियों से शिकायत करें।

-डॉ. बीके राजौरा, सीएमओ, जिला नागरिक अस्पताल

स्वास्थ्य मंत्री विज सख्त :

गुरुग्राम में महिला को आधार कार्ड न होने पर प्रवेश नहीं देने का स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने संज्ञान लिया है। उन्होंने कहा कि आधार कार्ड न होने की वजह से किसी भी मरीज का इलाज नहीं रोका जाएगा।

सोनीपत में हो चुकी घटना:

हरियाणा के सोनीपत में भी ऐसी घटना हो चुकी है। 29 दिसंबर को एक निजी अस्पताल ने कारगिल शहीद की विधवा को आधार कार्ड नहीं होने पर भर्ती नहीं किया था। इसके चलते महिला की मौत हो गई थी। मामले ने काफी तूल पकड़ा था।

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