नई दिल्ली। बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) आईसीआईसीआई बैंक के पिछले कुछ साल के वित्तीय खुलासों एवं बयानों की फोरेंसिक जांच कराने पर विचार कर रहा है। यह बैंक की मुख्य कार्यकारी अधिकारी चंदा कोचर और उनके पति का एक ऋण मामले में हितों के टकराव से संबंद्ध विवादों के बीच हो रहा है। सेबी के शीर्ष अधिकारियों के अनुसार नियामकीय आधिकार क्षेत्र से बचने के लिए पूंजी बाजार विनियामक इस विषय में भारतीय रिजर्व बैंक से भी सलाह लेगा। इस स्वतंत्र जांच में बैंक द्वारा पिछले कुछ सालों में किए गए खुलासों तथा वीडियोकॉन समूह को दिए गए विवादित ऋण के मामले में शेयर बाजारों द्वारा स्पष्टीकरण मांगे जाने पर दिए गए जवाबों पर ध्यान दिया जाएगा। आईसीआईसीआई बैंक ने वीडियोकान समूह को कुछ बैंकों के साथ मिल कर कर्ज दिया था।
अधिकारियों ने कहा कि इस जांच में उन खुलासों को भी शामिल किया जाएगा जो बैंक ने 2009 में चंदा कोचर के पहली बार सीईओ एवं एमडी नियुक्त किए जाने के समय किया था। यदि जरूरत हुई तो सेबी कथित हितों के टकराव का परीक्षण करने के लिए चंदा कोचर सहित बैंक के शीर्ष अधिकारियों के कारोबारी सौदों से संबंधित जानकारियां भी मांग सकता है। रिजर्व बैंक ने आई.सी.आई.सी.आई. बैंक और वीडियोकान के बीच ऋण के सौदे के मामले में मिली शिकायतों की जांच 2016 में एक जांच की थी। उस समय उसे इस सौदे में किसी प्रकार के लेन देन का मामला नहीं दिखा था।

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