बिलासपुर । छत्तीसगढ़ के बाल वैज्ञानिकों का ईको एनर्जी के क्षेत्र में किया गया आविष्कार अब व्यापक व्यावसायिक रूप ले सकता है। 'जिम में एक घंटा व्यायाम करें और बनाएं तीन किलोवॉट बिजली" शीर्षक से दैनिक जागरण और सहयोगी प्रकाशन नईदुनिया ने बच्चों द्वारा बनाए गए मॉडल के बारे में विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की थी।

20 अप्रैल के अंक में 'जागरण विशेष" के रूप में प्रकाशित खबर में बताया गया था कि इन बाल वैज्ञानिकों ने जिम में उपयोग होने वाले उपकरणों के जरिये ईको एनर्जी उत्पादित करने वाले मॉडल को विकसित किया है। जिसके जरिये एक व्यक्ति जिम में एक घंटा व्यायाम करने के साथ ही तीन किलोवॉट बिजली भी उत्पादित कर सकता है।

शुक्रवार को बाल वैज्ञानिकों को अंतरराष्ट्रीय टेक्नोलॉजी सॉल्यूशन कंपनी डेल की ओर से खुशखबरी मिली, जिसने उनके मॉडल के व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर रुचि जताई है। डेल कंपनी ने गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल, बिलासपुर के एटीएल (अटल टिंकरिंग लैब) के इंचार्ज को ईमेल भेज कर इस बारे में सूचित किया है।

डेल और एलएलएफ ( लर्निंग लिंक फाउंडेशन) की प्रमुख उषा भास्कर ने एटीएल इंचार्ज डॉ. धनंजय पांडेय को भेजे गए ईमेल में बाल वैज्ञानिकों के प्रोजेक्ट को अपनी कंपनी के माध्यम से व्यवसायिक रूप देने का प्रस्ताव रखा है।

इसके लिए मई के प्रथम सप्ताह में दोनों कंपनी के विशेषज्ञों की टीम स्कूल पहुंचेगी। उन्होंने नीति आयोग को भी इस निर्णय के बारे में सूचित कर दिया है। बता दें कि अटल टिंकरिंग लैब नीति आयोग की ही पहल है, इसके जरिये स्कूल स्तर पर बच्चों को वैज्ञानिक शोध के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

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