रायपुर। कम आय वालों को स्वरोजगार करने के लिए पिछले दो सालों में अंत्यावसायी सहकारी वित्त निगम ने छह करोड़ रुपए के लोन बांट दिए, लेकिन वसूलने में फिसड्डी रहे। मात्र इसके एवज में अभी तक 51 लाख 60 हजार 154 रुपए ही वसूल पाए।

इसमें अभी कुल 55 डिफाल्टरों से भी रिवकरी की जानी बाकी है। बाकी बकाएदारों को नोटिस भेजने की तैयारी चल रही है, जबकि इस बार लक्ष्य था कि हर हाल में वसूली को 80 फीसदी कर पूरा कर लेना है।

इनमें भी कुछ ऐसे भी बकाएदार हैं, जिनके नाम-पते भी गलत निकले। 2016-17 में करीब चार करोड़ स्र्पये और 2017-18 में दो करोड़ 43 लाख 43 हजार 17 रुपए यानी कुल छह करोड़ 43 लाख 43 हजार स्र्पए का लोन हितग्राहियों को बांटा गया था, लेकिन फील्ड अफसरों के वसूली करने में पसीने छूट गए।

सूत्रों के मुताबिक इनके लोन देते वक्त प्रस्तुत कागजातों की जांच और भौतिक सत्यापन करने में चूक भी हुई, लिहाजा कुछ हितग्राही डिफाल्टर निकले, क्योंकि इनके समूल दस्तावेजों के सभी बिन्दुओं की जांच नहीं की गई।

इन वर्गों को मिलता है लोन

अनूसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, सफाई कामगार और अल्पसंख्यक वर्गों को आर्थिक विकासमूलक योजनाओं के तहत स्वरोजगार दिलाने के लिए लोन स्वीकृत करता है, ताकि ये वर्ग आर्थिक रूप से स्वावलंबी बन सके। शासन द्वारा प्रत्येक वर्ग के लिए तय लक्ष्य के मुताबिक ही लोन देने का प्रावधान है। लोन देने वालों की संख्या सीमित होता हैं। इससे ज्यादा लोगों को लोन नहीं दिया जा सकता।

इनके लिए आए लोन के प्रकरण

98 हजार से एक लाख 20 हजार रुपए प्रतिवर्ष आय वाले हितग्राहियों को ही लोन दिया जाता है। इसमें के क्षेत्र में ट्रैक्टर-ट्राली, बकरी, मुर्गी व सूकर पालन के लिए लोन सब्सिडी के साथ दी जाती है।

इतने लोगों को बांटने के लिए मिला था लक्ष्य 

अंत्यावसायी सहकारी वित्त निगम को शासन ने एससी के लिए 115, ओबीसी के लिए 18, सफाई कामगार के लिए 80 प्रकरण पर लोन देने का लक्ष्य दिया था। इनकी जांच सिर्फ कागजों पर ही किया गया, लेकिन भौतिक सत्यापन करने में लापरवाही बरती गई।

- बांटे गए लोन की रिकवरी करने के लिए सतत प्रयासरत हैं। इसके लिए अधिकारियों को दिशानिर्देश दिए गए हैं। - एस. टप्पो, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, अंत्यावसायी सहकारी वित्त निगम

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