देश- काल परिस्थिति के अनुसार अर्थव्यवस्था और उसकी नीतियां बदलती रहती है. अर्थशास्त्र जीवन की बात है. हम इसे किसी वाद या थ्योरी तक सीमित नहीं रख सकते हैं. भारत को पूंजीवाद या समाजवाद जैसे वाद से बाहर निकलना होगा. किसी भी नीति की सफलता आंकड़ों में नहीं बल्कि इन आंकड़ों से होने वाले फायदे में है. यह विचार सर संघचालक मोहन भागवत ने मुंबई में आयोजित एक समारोह के दौरान कही. वह गोखले इंस्टीट्यूट आॅफ इकोनॉमिक रिसर्च और बम्बई स्टाक एक्सचेंज की तरफ से आयोजित समारोह में भारतीय अर्थव्यवस्था और आर्थिक नीतियां : दीर्घकालिक परिदृश्य ’’ विषय पर विशेष व्याख्यान दे रहे थे.

मोहन भागवत की बड़ी बातें : 

किसी भी नीति की सफलता इस बात पर निर्भर है कि वह लोगों की किस तरह से मदद करता है.

हमें अपने लोगों को के लिए आधुनिक आर्थिक नीतियों को लागू करना होगा. हमें अंतहीन मांग बढ़ाने से बचना होगा. इसके बजाय हमें संयम के साथ उपभोग की नीति पर चलना होगा.

सिर्फ सुरक्षा और समृद्धि ही सुख का प्रतिक नहीं है. इनके साथ शांति और संतुष्टि भी जरूरी है.

एयर इंडिया को लेकर मोहन भागवत ने कहा कि हमें अपने आकाश पर किसी का प्रभुत्व  स्वीकार नहीं करना चाहिए. बेहतर होगा कि एयर इंडिया को कोई भारतीय कंपनी ही चलाए.

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