नई दिल्ली। 2007 के मक्का मसजिद ब्लास्ट मामले में आज हैदराबाद की एक अदालत ने असीमानंद सहित सभी आरोपियों को बारी कर दिया। कोर्ट ने पुख्ता सबूत नहीं होने के आधार पर सभी आरोपियों को आरोप मुक्त कर दिया। अदालत ने कहा कि उनके खिलाफ केस नहीं बनता है। इस मामले में लोकेश शर्मा, राजेंद्र चौधरी भी आरोपी बनाये गये थे। अदालत ने एनआइए की दलील को आज मामले की सुनवाई करते हुए खारिज कर दिया।

2007 में हैदराबाद के मक्का मसजिद में संगमरमर की बेंच के नीचे ब्लास्ट हुआ था, जिसमें नौ लोगों की मौत हो गयी थी और कई घायल हुए थे। घटना के वक्ता पांच हजार के करीब लोग वहां मौजूद थे।
 जिन 8 लोगों के खिलाफ चार्जशीट बनाई गई थी उसमें से स्वामी असीमानंद और भारत मोहनलाल रत्नेश्वर उर्फ भरत भाई जमानत पर बाहर हैं और तीन लोग जेल में बंद हैं।  मक्का मस्जिद मामले में सीबीआई ने सबसे पहले 2010 में आसीमानंद को गिफ्तार किया था लेकिन 2017 में उन्हें जमानत मिल गई थी। इस केस के एक आरोपी  सुनील जोशी की जांच के दौरान कर दी गई थी और दो और आरोपियों संदीप वी डांगे, रामचंद्र कलसंग्रा के बारे में मीडिया रिपोर्टस में दावा किया गया है कि उनकी भी हत्या कर दी गई है। इससे पहले एनआईए मामलों की चतुर्थ अतिरिक्त मेट्रोपोलिटन सत्र सह विशेष अदालत ने सुनवाई पूरी कर ली है और पिछले हफ्ते फैसले की सुनवाई आज तक के लिए टाल दी थी। गौरतलब है कि 18 मई 2007 को दोपहर 1 के आसपास मस्जिद में धामाका हुआ था जिसमें 5 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी और 4 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे, बाद में इन चारों की भी मौत हो गई। बाद में इस मामले को सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया था लेकिन फिर यह मामला हृढ्ढ्र के पास चला गया।हैदराबाद मक्का मस्जिद ब्लास्ट फैसला रुढ्ढङ्कश्व : आरोपी असीमानंद पहुंचे नामपल्ली कोर्ट, आज आएगा फैसला 
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नई दिल्ली। हैदराबाद की मक्का मस्जिद में हुए ब्लास्ट पर आज फैसला आ सकता है। केस के आरोपी असीमानंद भी हैदराबाद की नामपल्ली कोर्ट पहुंच चुके हैं।  11 साल बाद आज हृढ्ढ्र कोर्ट इस मामले में फैसला सुना सकता है। बता दें कि  2007 को मक्का मस्जिद में हुए ब्लास्ट में 9 लोगों की मौत गई थी और 58 लोग घायल हुए थए। इसमें 10 आरोपी थे जिनमे से आठ के खलिफा चार्जशीट दाखिल की गई है। जिसमें स्वामी असीमानंद का नाम भी शामिल है। जिन 8 लोगों के खिलाफ चार्जशीट बनाई गई थी उसमें से स्वामी असीमानंद और भारत मोहनलाल रत्नेश्वर उर्फ भरत भाई जमानत पर बाहर हैं और तीन लोग जेल में बंद हैं।  मक्का मस्जिद मामले में सीबीआई ने सबसे पहले 2010 में आसीमानंद को गिफ्तार किया था लेकिन 2017 में उन्हें जमानत मिल गई थी। इस केस के एक आरोपी  सुनील जोशी की जांच के दौरान कर दी गई थी और दो और आरोपियों संदीप वी डांगे, रामचंद्र कलसंग्रा के बारे में मीडिया रिपोर्टस में दावा किया गया है कि उनकी भी हत्या कर दी गई है। इससे पहले एनआईए मामलों की चतुर्थ अतिरिक्त मेट्रोपोलिटन सत्र सह विशेष अदालत ने सुनवाई पूरी कर ली है और पिछले हफ्ते फैसले की सुनवाई आज तक के लिए टाल दी थी। गौरतलब है कि 18 मई 2007 को दोपहर 1 के आसपास मस्जिद में धामाका हुआ था जिसमें 5 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी और 4 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे, बाद में इन चारों की भी मौत हो गई। बाद में इस मामले को सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया था लेकिन फिर यह मामला हृढ्ढ्र के पास चला गया।

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