नई दिल्ली। देश के शीर्ष सैन्य कमांडरों का छह दिनी सम्मेलन राजधानी दिल्ली में सोमवार से शुरू हो रहा है। इसमें देश की मुख्य रक्षा चुनौतियों, खासकर चीन और पाकिस्तान सीमाओं और क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ ही विभिन्न अग्रिम मोर्चो से जुड़े खास मुद्दों पर मंथन होगा। सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत इसकी अध्यक्षता करेंगे। सेना के पीआरओ कर्नल अमन आनंद ने बताया कि यह सम्मेलन सुरक्षा, भविष्य की रक्षा चुनौतियों और विपरीत स्थितियों में युद्ध के कौशल को बढ़ाने की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
 उत्तरी सीमा पर सैन्य बुनियादी ढांचे, सामरिक रेलवे लाइनों की समीक्षा, गोला-बारूद की कमी दूर करने के लिए बजट बढ़ाने पर भी सम्मेलन में विचार-विमर्श होगा। चीन सीमा पर तैयारी की होगी समीक्षा सैन्य अफसरों ने बताया कि सम्मेलन में मुख्य जोर चीन से लगी करीब 4 हजार किमी लंबी सीमा पर सैन्य अभियान की समग्र तैयारी को लेकर रहेगा। पिछले साल जून में डोकलाम में 73 दिन तक दोनों देशों के बीच सैन्य गतिरोध को देखते हुए चीन को मुख्य चुनौती माना जा रहा है। इस गतिरोध के बाद भारत ने चीन सीमा पर ज्यादा जवानों को तैनात करने के साथ ही गश्त भी बढ़ा दी है। 
साल में दो बार होती है समीक्षा 
सैन्य कमांडरों के सम्मेलन साल में दो बार होते हैं। कर्नल आनंद ने बताया कि इसमें सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) से जुड़े प्रोजेक्टों और सेना के साजो-सामान से संबंधित मसलों पर भी विचार होगा। जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा के हालात की भी समीक्षा होगी। छह दिनी सम्मेलन के अंतिम तीन दिनों में विषयवार और सेना के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के क्रिन्यान्वयन पर मंथन होगा।
 

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