लाहौर। एजेंसी
अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत रहे हुसैन हक्कानी ने इस्लामाबाद को चीन का पिछलग्गू नहीं बनने की नसीहत दी है। उन्होंने कहा, पाक को लड़ाकू देश बनने के बजाय कारोबारी देश बनना चाहिए। हक्कानी ने एक साक्षात्कार में कहा, पाकिस्तान को यह तय करने की जरूरत है कि उसके लिए आतंकी हाफिज सईद का समर्थन और अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता व सम्मान हासिल करने में क्या अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने जोर देकर कहा, पाकिस्तान को चीन पर निर्भर नहीं रहना चाहिए और उसे बीजिंग की कठपुतली बनने से बचना चाहिए। पूर्व राजदूत ने इस्लामाबाद को एक बड़ी शक्ति के साथ जुडऩे के खतरों के प्रति आगाह करते हुए कहा , उसे आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए।  राजदूत ने कहा, पाकिस्तान ने खुद को किसी एक बड़ी शक्ति या दूसरों द्वारा इस्तेमाल किए जाने की अनुमति देकर अपनी रणनीतिक स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश की। लेकिन इस कोशिश ने ही पाकिस्तान को वर्तमान स्थिति में ला खड़ा किया है। उन्होंने कहा, लड़ाकू देश बनने की जगह कारोबारी देश बनना चाहिए और भू रणनीति की जगह भू आर्थिक की तरफ सोचना शुरू करना चाहिए। 
कश्मीर मुद्दे का जल्द हल नहीं 
कश्मीर के मुद्दे पर हक्कानी ने कहा ,यह एक हकीकत है कि कश्मीर समस्या का समाधान 70 साल में नहीं हुआ है। यदि पाकिस्तान भारत के साथ संबंधों को सामान्य करने की दिशा में बढऩे से पहले कश्मीर समस्या के समाधान पर जोर देता है, तो 70 साल और इंतजार करना पड़ेगा। लड़ाकू देश बनने की जगह कारोबारी देश  बनना चाहिए और भू रणनीति की जगह भू आर्थिक की तरफ सोचना शुरू करना चाहिए। 
हक्कानी के बयान के मायने 
हक्कानी 2008 से 2011 तक अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत रह चुके हैं। उनकी टिप्पणियों ने पाकिस्तान को दी जाने वाली 1.15 अरब डॉलर की अमेरिकी सुरक्षा सहायता रोकने में अहम भूमिका निभाई। हक्कानी ने कहा था कि पाक अफगानिस्तान में हक्कानी नेटवर्क और तालिबान की मदद कर रहा है। हक्कानी 2008 से 2011 तक अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत थे। 

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