उत्तरप्रदेश सरकार के मंत्री मोहसिन रजा ने स्वयं को 'हिंदूÓ कह कर एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। मोहसिन रजा की पहचान राष्ट्रवादी मुस्लिम नेता के तौर पर है। वे उत्तरप्रदेश में वक्फ राज्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वह साफगोई से अपनी बात कहते हैं। बाबा साहब डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर जयंती प्रसंग पर आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा- ''हिंदुस्तान में रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति हिंदू है, लिहाजा वह खुद भी हिंदू हैं।ÓÓ पूजा-पद्धति से मुस्लिम मत के होकर मोहसिन रजा जब यह कहते हैं कि वह हिंदू हैं, तो इस कथन के बहुत गहरे अर्थ हैं। यकीनन 'हिंदूÓ बड़ी पहचान है, जो राष्ट्र के साथ जुड़ी है। हम सबको ज्ञात है कि सर्वोच्च न्यायालय ने तो हिंदू को धर्म नहीं, अपितु जीवनपद्धति कहा है। वहीं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वर्तमान सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत और उनके पूर्ववर्ती सरसंघचालक भी यह कहते हैं कि पुण्यभूमि भारत पर रहने वाला वह प्रत्येक व्यक्ति हिंदू है, जो भारत को अपनी मातृभूमि मानता है। अर्थात् इस परिभाषा में मुस्लिम और ईसाई सहित अन्य मत-संप्रदाय के लोग भी आते हैं। वही बात मंत्री मोहसिन रजा ने दोहराई है। उनसे पहले भी अनेक लोग इस प्रकार स्वयं को ङ्क्षहदू बता चुके हैं। गोवा के पूर्व उपमुख्यमंत्री फ्रांसिस डिसूजा बड़े गर्व के साथ कहते हैं- 'इसमें कोई शक नहीं कि भारत हिन्दू राष्ट्र है। भारत हमेशा से हिन्दू राष्ट्र रहा है और आगे भी रहेगा। उन्होंने कहा कि इस देश में रहने वाले सभी लोग हिन्दू हैं, मैं खुद एक ईसाई हिन्दू हूं।Ó दरअसल, हिंदू और हिंदुत्व के प्रति द्वेष भाव रखने वाले यह समझना नहीं चाहते हैं कि हिंदू शब्द नागरिकता को बोध भी कराता है। जिस प्रकार इंग्लैण्ड में रहने वाले अंग्रेज हैं, जर्मनी में रहने वाले जर्मन हैं और अमरीका में रहने वाले अमेरिकन हैं, उसी प्रकार हिन्दुस्थान में रहने वालों की नागरिक पहचान हिंदू है। भारत में निवास करनेवाला एवं भारतीय संस्कृति का अनुसरण करनेवाला हिन्दू है। सभी भारतीय हिन्दू हैं। भारतीयत्व ही हिन्दुत्व है। केवल मुस्लिम अथवा ईसाई होने के कारण ही किसी की राष्ट्रीयता में परिवर्तन नहीं होता है। भारत के बाहर कई मुस्लिम देशों में यहाँ के मुसलमानों को हिंदू या हिंदी मुसलमान के नाते ही पहचाना जाता है। यदि सब यह स्वीकार कर लें कि सभी भारतीयों की सांस्कृतिक पहचान हिन्दुत्व है, इस देश में रहने वाले इस महान संस्कृति के वंशज हैं, हिन्दुत्व एक जीवन शैली है और किसी भी ईश्वर की उपासना करने वाला या किसी भी ईश्वर की उपासना नहीं करने वाला भी हिन्दू हो सकता है, तब सांप्रदायिक समस्या का अंत हो सकता है। हिंदू वह विचार है, जिसमें सब हिंदू होकर भी अपने स्वतंत्र अस्तित्व को बनाए रख सकते हैं। हिंदुत्व विविधताओं को समृद्ध करता है। भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के गहरे मित्र, प्रख्यात कवि और लेखक रामधारी सिंह दिनकर ने भी अपनी पुस्तक 'संस्कृति के चार अध्यायÓ में लिखा है कि असल में, भारतवर्ष हिन्दुओं का ही देश है और इस देश की संस्कृति अपनी व्यापक विशिष्टताओं के साथ हिन्दू-संस्कृति ही समझी जाती है। वे आगे लिखते हैं कि भारत से बाहर के लोग भारत अथवा भारतवासियों को हिन्दू या 'इंडोÓ कहा करते थे, इसके प्रमाण हैं। भारतवर्ष को हिन्दुस्तान और भारतवासियों को हिन्दू कहना इतिहास और भूगोल, दोनों ही दृष्टियों से युक्ति-संगत है। उत्तरप्रदेश सरकार के वक्फ राज्य मंत्री मोहसिन रजा की प्रशंसा की जानी चाहिए कि उन्होंने स्वयं की राष्ट्रीयता को मत-संप्रदाय से ऊपर उठकर गर्व के साथ स्वीकार किया है। 

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