अक्सर आपने देखा होगा कि आपके आस पास के लोग पाचन से जुड़ी तकलीफों का रोना रोते होगें। कोई पेट दर्द से परेशान रहता है तो किसी को कब्जियत, गैस, डकार, पथरी, अल्सर, कोलाइटिस, रिफ्लक्स या आईबीएस से जुझता नजर आएगा। लेकिन क्या आपको पता है इनमें से अधिकतर समस्याएं हमारी छोटी और बड़ी आंत में रहने वाले बैक्टीरिया (गट फ्लोरा) में हुए असंतुलन के कारण होती हैं।

ये समस्याएं ज्यादा क्लोरीनयुक्त पानी पीने से, ज्यादा मीठा, जंक फूड खाने से और एंटीबायोटिक खाने से यह गट फ्लोरा को प्रभावित करती हैं। जिससे हमारे पेट की बीमारियां पैदा होने लगती हैं। लेकिन घबराने की बात नहीं है आप प्रोबायोटिक को शामिल करके इन समस्याओं से आसानी निपट सकते हैं। आइए हम आपकों बताते है कि किन-किन फूड्स का सेवन करने आप प्रोबायोटिक- प्रीयबायोटिक की मात्रा को संतुलित कर सकते हैं। 

जानें कैसे काम करता हैं प्री-बॉयटिक्स और प्रोबायोटिक्स

प्रोबायोटिक एक प्रकार का अच्छा बैक्टीरिया होता है, जो हमारी आंत में रहता हैं। यह हमारे स्वास्थ्य के लिये बेहद फायदेमंद हैं। ये बैक्टीरिया भोजन को पचाने, कोलेस्ट्रॉल के स्तर को घटाने, पोषक तत्वों को सोखने और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मददगार होता है। अगर गलत खाने या एंटिबायोटिक के इस्तेमाल की वजह से शरीर में ज्यादा खराब बैक्टीरिया घुस जाते हैं तो संतुलन बिगड़ने से पूरा शरीर प्रभावित होता है।

प्रोबायोटिक्स फायदेमंद बैक्टीरिया हैं जो आंत में रहते हैं और पाचन सुधार में मदद करते हैं। प्रोबायोटिक्स के विपरीतप्री-बॉयटिक्स न पचने वाले कार्बोहाइड्रेट्स होते हैं, जो फाइबर से भरे होते हैं और ये आंतों में बैक्टीरिया के विकास को बढ़ावा देते हैं। आप प्रीबायोटिक्स को हजम नहीं कर सकते हैं। चूंकि प्री-बॉयटिक्स और प्रोबायोटिक्स सहजीवी तरीके से काम करते हैं, इसलिए दोनों के संयोजन फायदेमंद होता है।

 दही
आजकल बाजार में बिकने वाली प्रोबायोटिक दही खूब प्रचलित है लेकिन यह घर में तैयार की गयी दही में भी प्रचुर मिलती है। प्रोबायोटिक खाद्य पदार्थों में से जीवित-सुसंस्कृत दही सबसे अच्‍छा है, विशेष रूप से हाथ का बना।

दूध से दही बनने की प्रक्रिया में ‘लेक्टोबेसिलस जीवाणु’ अपनी भूमिका अदा करते हैं।  हालांकि डेयरी उत्पाद जैसे दही और छाछ प्रोबायोटिक के अच्छे स्त्रोत हैं। बता दें कि दही में प्रोबायोटिक्स तत्व मौजूद होते है जो डाइजेशन ठीक रखते है। इसके सेवन से पेट भी भरा-भार रहता है।

पनीर और योगर्ट
पनीर, योगर्ट, चीज़ आदि कुछ डेयरी प्रोडक्ट्स में प्रोटीन भरपूर मात्रा में होता है। चीज़ के मुकाबले पनीर और योगर्ट में कैलोरी भी कम होती है इसलिए इसे खाने से आपके डाइट प्लान पर भी ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। गाय के दूध से बने 100 ग्राम पनीर में 18.3 ग्राम प्रोटीन होता है जो अंडे से कहीं ज्यादा है।

पनीर से भी कई तरह की स्वादिष्ट डिशेज बनाई जा सकती हैं।  पनीर में भी इसकी खुब मात्रा पाई जाती है। पनीर को फल और अखरोट के साथ मिलाएं, या जैतून का तेल, ककड़ी स्लाइस और नमक और काली मिर्च के साथ सेवन करने से प्री-बॉयटिक्स और प्रोबायोटिक्स संतुलित किया जा सकता है। 

किमची 

किमची में खमीर उठाया जाता है जो कि हमारे पेट को साफ रखने में मददगार साबित होते हैं।  इसे कोरियन सलाद रेसिपी कहा जाता है। यह आम सलाद से थोड़ा अलग है । असल में खमीर के कारण इसमें प्रोबायोटिक बैक्टीरिया पनपते हैं जो कि हमारे पेट को साफ रखते हैं।

यही कारण है कि विशेषज्ञ किमची खाने की सलाह देते हैं। पेट की छुटपुट बीमारियों से दूर रहने के लिए भी किमची लाभदायक होता है। इसमें पत्तागोभी को लहसुन, अदरक, सोया सॉस, सिरका और चिली फ्लेक्स में भिगोकर रखा जाता है।

खट्टी गोभी (Sauerkraut)

खट्टी गोभी (Sauerkraut) एक प्रकार की गोभी होती है जिसे लैक्टिक ऐसिड के प्रयोग से उगाया जाता है। इसमें सामान्य गोभी की तुलना में अधिक पौष्टिकता होती है जो आपको फिट और निरोग रखने में मदद करती है। आम-किमची सलाद से भी ज्यादा प्रोबायोटिक्स की दोहरी खुराक पाई जाती है। 

मिसो सूप

मिसो परंपरागत जापानी दवा का एक मुख्य स्रोत रहता है और आमतौर पर पाचन नियामक के रूप में माइक्रोबॉयोटिक खाना पकाने के लिए इस्‍तेमाल किया जाता है। गर्म पानी में एक चम्‍मच मिसो फर्मेन्टेड राई, बींस, चावल या जौ मिलाकर बनाया जाता है।

यह लैक्टोबैसिलस और बिफिडस बैक्‍टीरिया से भरपूर से एक अच्‍छा, जल्‍द और प्रोबायोटिक युक्‍त सूप है। इसके अलावा यह पर्यावरण प्रदूषण के प्रभाव को कम करने और शरीर को ऐल्‍कलाइन कर शरीर से कैंसरकारी प्रभाव को रोकने में मदद करता है। 

अचार

चाहे आप मानो या न मानो, लेकिन हरा अचार भी प्रोबायोटिक्‍स का एक उत्‍कृष्‍ट आहार स्रोत है, बेशर्त वह घर में बना होना चाहिए। इसलिए प्रोबायोटिक के लाभ पाने के लिए धूप में खुद घर में अचार बनाने की कोशिश करे। 

जानें प्रोबायोटिक के फायदे...

प्रोबायोटिक का इस्तेमाल मूत्र नली और यौनांगों में हुए कुछ संक्रमणों के इलाज में किया जा सकता है। प्रोबायोटिक पर किये गये अध्ययनों से पता चला है कि यह कोलोरेक्टल कैंसर और स्तन कैंसर में भी लाभकारी है। बैक्टीरिया के संतुलन से एलर्जी का खतरा भी काफी कम हो जाता है। लैक्टोबैसिलस रैम्नोसस और बिफिडोबैक्टीरिया दोनों एलर्जी कम करने में मददगार हैं।

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