सूर्य का मेष राशि में प्रवेश दिनांक 14 अप्रैल का हो रहा है। इसे वैशाखी की सूर्य संक्रांति भी कहते हैं। इस दिन गंगा स्नान का बहुत पुण्य है। इस बार यह तिथि शनिवार को पड़ रही है जो क‍ि इस संवत के मंत्री हैं। शनि भगवान सूर्य के पुत्र भी हैं। इसे पोहेला, वैशाख संक्रांति, बिहू इत्यादि के रूप में देश के कई भूभागों में मनाया जाता है। इस दिन दान का बहुत महत्व है। सूर्य का उच्च राशि में प्रवेश उन्नति का प्रतीक है। सूर्य के मेष में प्रवेश करते ही खरमास की समाप्ति हो जायेगी।

ज्‍योतिषाचार्य सुजीत महाराज का कहना है कि इस पूरे माह सूर्य उपासना करिए। ये शुभ फल देगा। श्री आदित्यहृदयस्तोत्र का पाठ करिए। भगवान शिव की उपासना का विशेष महत्व है। मेष राशि का स्वामी होता है मंगल। मंगल और सूर्य के बीज मन्त्र का जप प्रत्येक मंगलवार और रविवार को करना चाहिए। पूरे एक माह तक का समय बहुत ही पावन होता है। इस समय दान का विशेष महत्त्व है। मंगल और सूर्य से सम्बंधित द्रव्यों गेहूं, गुड़ इत्यादि का दान कीजिये और जगह-जगह पीने के जल की व्यवस्था करना चाहिए। संतान प्राप्ति हेतु श्रीहरिवंशपुराण की कथा सुनना संतान की प्राप्ति करवाता है। इस महीने किसी पवित्र नदी में स्नान अवश्य कीजिये.

जानें क्‍या है हरिवंशपुराण
हरिवंशपुराण में तीन पर्व - हरिवंशपर्व, विष्णुपर्व तथा भविष्यपर्व तथा 318 अध्याय हैं। इस पुराण में सबसे पहले वैवस्तमनु और यम की उत्पत्ति के बारे में बताया है और साथ ही भगवान विष्णु के अवतारों के बारे में बताया है। आगे देवताओं का कालनेमि के साथ युद्ध का वर्णन है जिसमें भगवान विष्णु ने देवताओं को सान्त्वना दी और अपने अवतारों की बात निश्चित कर देवताओं को अपने स्थान पर भेज दिया। इसके बाद नारद और कंस के संवाद हैं।

इस पुराण में भगवान विष्णु का कृष्ण के रूप में जन्म बताया गया है। जिसमें कंस का देवकी के पुत्रों का वध से लेकर कृष्ण के जन्म लेने तक की कथा है। फिर भगवान कृष्ण की ब्रज-यात्रा के बारे में बताया है जिसमें कृष्ण की बाल-लीलाओं का वर्णन है। इसमें धेनुकासुर वध, गोवर्धन उत्सव का वर्णन किया गया है। आगे कंस की मृत्यु के साथ उग्रसेन के राज्यदान का वर्णन है। आगे बाणसुर प्रसंग में दोनों के विषय में बताया है। भगवान कृष्ण के द्वारा शंकर की उपासना का वर्णन है। हंस-डिम्भक प्रसंग का वर्णन है। अंत में श्रीकृष्ण और नन्द-यशोदा मिलन का वर्णन है।

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