ऑफिस में ज्यादातर समय डेस्क पर या घर में भी घंटों बैठे रहना सेहत के साथ-साथ दिमाग को भी नुकसान पहुंचा सकता है। एक अध्ययन में कहा गया है कि आलस हो या मजबूरी, घंटों बैठे रहने से दिमाग सिकुड़ने लगता है, जिससे भविष्य में अलजाइमर्स की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है ज्यादातर समय बैठकर बिताना हमें बुद्धू बना सकता है। लॉस एंजिलिस स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के शोधकर्ताओं ने अध्ययन में देखा कि आरमतलब जिंदगी जीने वालों का मस्तिष्क सिकुड़ जाता है। पूर्व में हुए अध्ययनों में भी कहा गया है कि नियमित रूप से लंबे समय तक बैठे रहने से दिल की बीमारियों, डायबिटीज और कई तरह के कैंसर का खतरा होता है।

अध्ययन के दौरान विशेषज्ञों ने देखा कि आरामतलब जिंदगी से दिमाग के वो हिस्से प्रभावित होते हैं जहां पर याद्दाश्त होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे लोगों के मस्तिष्क के मीडियल टेंपोरल लोब (एमटीएल) में ग्रे मैटर काफी कम मात्रा में होता है। इस क्षेत्र में गिरावट से भविष्य में डिमेंशिया और अलजाइमर्स जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। यह अध्ययन प्लस वन जर्नल में प्रकाशित हो चुका है। 

विशेषज्ञों ने इस नतीजे पर पहुंचने के लिए 45 से 75 साल के वयस्कों के जीवनशैली संबंधी आंकड़ों का अध्ययन किया। शोधकर्ताओं ने अध्ययन में शामिल सभी वॉलंटियर का एमआरआई स्कैन किया, जिसमें एमटीएल का विस्तृत ब्योरा था। मस्तिष्क के इस हिस्से में हर छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी बात दर्ज होती है।

विदेश