नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी ने घाटे में चल रहीरियल एस्टेट कंपनी आम्रपाली ग्रुप पर आरोप लगाया है. कंपनी ने धोनी के एंडोर्समेंट के करीब 150 करोड़ रुपए नहीं चुकाए हैं. धोनी इसे वसूलने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गए हैं. धोनी ने आरोप लगाया है कि कंपनी का ब्रैंड एम्बेसेडर बनने के लिए उन्हें कई साल से भुगतान नहीं किया गया है. आपको बता दें, आम्रपाली पिछले कुछ वर्षों से वित्तीय संकट का सामना कर रही है और यह अपने कई हाउसिंग प्रॉजेक्ट्स पूरे नहीं कर सकी है. 

आम्रपाली के खिलाफ कोर्ट में केस
 धोनी के अलावा कई क्रिकेटर्स के एंडोर्समेंट संभालने वाली फर्म रिति स्पोर्ट्स ने आम्रपाली के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में बकाया रकम की वसूली से जुड़ा मामला दर्ज कराया है. रिति स्पोर्ट्स के मैनेजिंग डायरेक्टर अरुण पांडे का कहना है कि ‘कंपनी ने ब्रैंडिंग और मार्केटिंग एक्टिविटीज के लिए पैसा नहीं दिया.’ पांडे के मुताबिक, रिति स्पोर्ट्स का आम्रपाली पर लगभग 200 करोड़ रुपए बकाया है. 

7 साल तक रहे ब्रैंड एम्बेसेडर
धोनी 6-7 साल तक आम्रपाली के ब्रैंड एम्बेसेडर रहे थे. आम्रपाली के हाउसिंग प्रॉजेक्ट के पूरा न होने को लेकर नाराज होमबायर्स के सोशल मीडिया पर धोनी को निशाना बनाने के बाद उन्होंने अप्रैल 2016 में कंपनी से ब्रैंड एम्बेसेडर के तौर पर अपना नाता तोड़ लिया था. होमबायर्स ने अपने ट्वीट्स में धोनी से आम्रपाली से खुद को अलग करने या कंपनी पर हाउसिंग प्रॉजेक्ट के बकाया काम को पूरा करने का दबाव डालने को कहा था. इस बारे में आम्रपाली के प्रवक्ता से संपर्क नहीं हो सका.

वर्ल्ड कप के बाद किया था विला देने का वादा
आम्रपाली ने 2011 में क्रिकेट वर्ल्ड कप में भारत की जीत के बाद टीम इंडिया के प्रत्येक सदस्य को नोएडा एक्सटेंशन के आम्रपाली ड्रीम वैली प्रॉजेक्ट में 9 करोड़ की वैल्यू वाला एक विला तोहफे के तौर पर देने का ऐलान किया था. हालांकि, आम्रपाली ने इसमें भी गड़बड़ी की और धोनी को 1 करोड़ रुपए की कीमत वाला विला और टीम के बाकी सदस्यों को 55 लाख रुपए का विला दिया गया. हालांकि, मामले से जुड़े एक व्यक्ति का कहना है कि ऐसे कोई विला बनाए ही नहीं गए और न ही किसी को गिफ्ट किए गए. आपको बता दें, आम्रपाली ग्रुप को नोएडा और ग्रेटर नोएडा में 10 हाउसिंग प्रॉजेक्ट्स में लगभग 40,000 फ्लैट की डिलीवरी देनी है.

मंदी के कारण घटी बिक्री
कंपनी का कहना है कि रीयल्टी सेक्टर में मंदी के कारण उसकी बिक्री घट गई है और इस वजह से उसे प्रॉजेक्ट्स पूरे करने में मुश्किल हो रही है. पिछले वर्ष बैंक ऑफ बड़ौदा ने आम्रपाली ग्रुप के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में इन्सॉल्वंसी के लिए याचिका दायर की थी. इसके बाद आम्रपाली ग्रुप के प्रॉजेक्ट्स में अपार्टमेंट खरीदने वाले लोगों ने अपने इन्वेस्टमेंट की सुरक्षा की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी.

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