राजनीति सकारात्मक कार्यों और प्रवृत्ति को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक प्रशंसा करना अच्छी बात है। अमूमन हम लोग सार्वजनिक चर्चा या सभा में समस्याओं का बखान करते हैं, समाज में पैर फैला रही नकारात्मकता की चर्चा भी करते हैं। इस सबमें हम समाधान, अच्छे काम और सकारात्मक प्रवृत्ति की सराहना करने से चूक जाते हैं। अपने आस-पास रचनात्मक और सकारात्मक प्रयासों को देखना हम भूल जाते हैं। इससे होता यह है कि समाज में जिन बातों की चर्चा होती है, उसी का प्रचार-प्रसार होता है। अर्थात् नकारात्मकता का प्रसार बढ़ता ही जाता है। इसलिए यह आवश्यक है कि हम सार्वजनिक विमर्श में उन बातों को भी शामिल करें, जिनसे सकारात्मकता प्रोत्साहित हो। रचनात्मक प्रयासों की सफलता की सच्ची कहानियां सुनकर शेष समाज भी उस दिशा में आगे और एक भारत-श्रेष्ठ भारत बनाने में अपना अमूल्य योगदान दे। महात्मा गांधी के चंपारण सत्याग्रह के मौके पर आयोजित 'सत्याग्रह से स्वच्छाग्रहÓ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मीडिया से कैमरा एक व्यक्ति पर फोकस करने के लिए कहा तो हर कोई हैरान था कि वह व्यक्ति कौन है। वह शख्स थे, पूर्व आईएएस अधिकारी परमेश्वरन जी. अय्यर। देश में स्वच्छता अभियान को आगे बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने उनकी सराहना करते हुए कहा कि वे मिसाल हैं। उन्होंने कहा कि परमेश्वरन अय्यर आईएएस की नौकरी छोडऩे के बाद अमेरिका चले गए थे, लेकिन देश की जरूरत के लिए वापस आए और स्वच्छता के क्षेत्र में मिसाल कायम की।
परमेश्वरन की प्रशंसा करते समय प्रधानमंत्री ने सबसे महत्वपूर्ण बात कही कि सरकारी अधिकारी जो काम करते हैं, आमतौर पर वह अनाम रहता है। वह पर्दे के पीछे काम करते हैं, लेकिन कुछ बात ऐसी होती है, जिसे बताने का मन करता है।Ó दरअसल, सरकारी कर्मचारी का दायित्व ही है कि वह समाज के लिए श्रेष्ठ कार्य करे। अमूमन हम ज्यादातर सरकारी कर्मचारियों को भ्रष्ट और कामचोर मान लेते हैं। जबकि ऐसा नहीं है। बहुत-से सरकारी अधिकारी-कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी का पूरी ईमानदारी से निर्वहन करते हैं। बल्कि कहना चाहिए कि व्यवस्था में गुणोत्तर सुधार के लिए नवाचार भी करते हैं। किंतु, उनके काम की प्रशंसा इसलिए नहीं की जाती, क्योंकि वह उनके काम का हिस्सा है। यहाँ हमें यह समझना चाहिए कि अवश्य ही श्रेष्ठ प्रदर्शन करना प्रत्येक सरकारी अधिकारी-कर्मचारी की जिम्मेदारी है। परंतु, यदि वह अच्छा काम कर रहा है तो हमें उसके काम की खुलकर सराहना करनी चाहिए। ताकि जिस सरकारी व्यवस्था को हम हीनभाव से देखते हैं, उसमें अच्छे कामों का प्रतिशत बढ़ सके। यह मानवीय स्वभाव है कि वह सार्वजनिक प्रशंसा चाहता है। जब अच्छे कार्यों की प्रशंसा की जाएगी तो और भी बहुत से अधिकारी अपने काम को अधिक प्रामाणिकता से करने के लिए आगे आएंगे। उल्लेखनीय है कि बिना किसी प्रचार-प्रसार की लालसा के प्रसन्न चित्त से अपना कार्य करने वाले स्वच्छ भारत मिशन कार्यक्रम के मुखिया परमेश्वरन अय्यर को सैनिटेशन और पेयजल विशेषज्ञ के तौर पर जाना जाता है। उन्होंने १९८१ में आईएएस की नौकरी से स्वेच्छा से इस्तीफा दिया और अमेरिका चले गए। बाद में, प्रधानमंत्री मोदी के आग्रह पर वापस भारत लौटे और सरकार ने उनकी विशेषज्ञता का लाभ स्वच्छ भारत अभियान के लिए लिया। उनकी रचनात्मक सोच का परिणाम है कि आज देश में स्वच्छता को लेकर एक सकारात्मक वातावरण बन गया है। यह सहज ही समझा जा सकता है कि परमेश्वरन से अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी प्रेरित होकर नवाचारी बने, यही भाव के साथ प्रधानमंत्री ने उनकी सार्वजनिक प्रशंसा की होगी। 

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