काला  हिरण शिकार मामले में फिल्म अभिनेता सलमान खान को सुनाई गई सजा से स्वाभाविक ही यह संदेश गया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। यह भी कि न्याय-व्यवस्था सबूत के आधार पर चलती है। पुख्ता सबूत हों, तो किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति का सजा से बचना संभव नहीं। पिछले दिनों बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को भी बीते दिनों सजा दी गई है। ऐसे उदाहरणों से ही न्याय-व्यवस्था पर लोगों का भरोसा मजबूत होता है। यह और पुख्ता हो, इसके लिए जरूरी है कि हमारी न्याय प्रणाली की गति बढ़ाई जाए। यह बात दीगर है कि काला हिरण शिकार मामले में अभिनेता सलमान खान को पांच साल कारावास की सजा सुनाए जाने से उनके लाखों प्रशंसकों को दु:ख पहुंचा है। परंतु, इस फैसले में कई संदेश निहित हैं, जिन पर देश के तमाम प्रभावशाली व्यक्तियों के साथ-साथ आम नागरिकों को भी गौर करना चाहिए। न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि दोषी चाहे कितना भी प्रसिद्ध या प्रभावशाली क्यों न हो, कानून के फंदे से बच नहीं सकता। यह निर्णय बताता है कि कुछ कानूनों को हल्के में लेने की हमारी प्रवृत्ति घातक सिद्ध हो सकती है। पर्यावरण और वन्य जीव जैसे मामले को आम तौर पर संजीदगी से नहीं लिया जाता। इन मामलों में किसी तरह की अनियमितता को लेकर न तो लोग जागरूक होते हैं, न ही प्रशासनिक तंत्र मुस्तैद रहता है। काला हिरण मामले में अगर बिश्नोई समाज तत्पर नहीं हुआ होता तो शायद यह इस अंजाम तक नहीं पहुंच पाता। निश्चित रूप से इस प्रकरण का सबसे बड़ा संदेश यह है कि 'लोकप्रियÓ होना एक विशिष्ट जवाबदेही है, जिसका हर हाल में ध्यान रखा जाना जरूरी है। काले हिरणों के शिकार की घटना 1998 में 'हम साथ-साथ हैंÓ फिल्म की शूटिंग के दौरान हुई थी। आरोप है कि सलमान खान अपने सह-कलाकार सैफ अली खान, तब्बू, सोनाली बेंद्रे और नीलम के साथ जोधपुर के पास कांकाणी गांव गए थे और वहां उन्होंने दो हिरणों का शिकार किया था। लोगों ने इन्हें देख लिया तो ये जिप्सी में बैठकर फरार हो गए। आमतौर पर कामयाब और चर्चित लोग यह मानकर चलते हैं कि लोग-बाग उनकी एक झलक के लिए पागल दिखते हैं, लिहाजा वे कुछ भी कर सकते हैं। समाज और प्रशासन तंत्र उनकी गलती को अपने आप नजरअंदाज कर देगा। ऐसे लोग अपने लिए हर स्तर पर विशेष छूट की अपेक्षा करते हैं, जो अकसर उन्हें मिल भी जाती है। लेकिन उन्हें समझना चाहिए कि समाज उनका गुलाम नहीं है। लोग उन्हें अपना आदर्श मानते हैं, उनके हर आचरण की नकल करते हैं, इसलिए उनकी यह जवाबदेही बनती है कि वे ऐसा कुछ न करें, जिसे लोग गलत उदाहरण की तरह ग्रहण करने लगें। उन्हें नियम-कानून का पालन करना चाहिए, अपने सहयोगियों से मधुर व्यवहार करना चाहिए और सार्वजनिक रूप से ऐसा कोई बयान नहीं देना चाहिए, जिससे समाज में अशांति फैले। इस प्रकरण में बिश्नोई समुदाय की चर्चा भी जरूर होनी चाहिए, जो विपरीत परिस्थितियों में भी वन्यजीवों से अपने लगाव पर डटा रहा। काले हिरणों को उस समुदाय के लोग अपने बच्चों सा स्नेह देते हैं। इस मामले में अब तक उन्होंने मजबूती से लड़ाई लड़ी है और देश को यह संदेश दिया है कि परिवेश की रक्षा प्रतिबद्धता से होती हैं। इसी संदर्भ में यह भी देखा जाना चाहिए कि सलमान खान को पांच साल की सजा सुनाए जाने के बावजूद बिश्नोई समुदाय संतुष्ट नहीं है, वह इस बात से नाराज हैं कि बाकी आरोपी अभिनेताओं को क्यों बरी कर दिया गया। उन्हें भी सजा दिलाई जा सके इसके लिए उन्होंने ऊपरी अदालत में अपील करने की बात कही है। यह प्रकरण न्याय-व्यवस्था के प्रति भरोसा तो उत्पन्न करता ही है, साथ में प्रभावशाली और लोकप्रिय व्यक्तियों के लिए एक सबक भी है। उन्हें यह समझना चाहिए कि उनकी लोकप्रियता समाजजीवन से ऊपर नहीं है। 

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