भिलाई, जिले में पहली बार हुई कबूतर चोरी के मामले को पुलिस ने सुलझा लेने का दावा किया है। पुलिस ने मामले को सुलझाने के लिए खास तरह की टीम का गठन किया था। जिसने मामले का सुलझाया। प्रार्थी का एक कबूतरबाज दोस्त ही चोरी का मास्टर माइंड है। जिसने अपने बेटे व उसके दोस्तों के साथ मिलकर चोरी की घटना को अंजाम दिया था। प्रारंभिक जांच में पता चला कि आरोपी कबूतरबाजी की प्रतियोगिता में लगातार मिल रही हार से क्षुब्ध था और उसने हार का बदला लेनेके लिए चोरी की साजिश रची।

फिलहाल पुलिस ने चोरी हुए 120 कबूतरों में से 53 कबूतरों समेत उसके खरीदार और चोरी में शामिल तीन अपचारी बालकों को गिरफ्तार कर लिया है। पत्रकार वार्ता में मामले का खुलासा करते हुए एएसपी दौलत राम पोर्ते ने बताया कि भैसासुर महादेव मंदिर के पास सुभाष नगर कसारीडीह निवासी रथीन्दर नाथ मैती उर्फ राजू बंगाली ने बद्मनाभपुर चौकी में दो दिन पहले 120 कबूतर, सोने की चेन और एक अंगूठी चोरी की रिपोर्ट लिखाई थी। चोरी किए गए सभी कबूतर विभिन्न प्रतियोगिता के लिए तैयार किए गए थे। ये भीषण गर्मी में भी आठ से नौ घंटे तक नियमित रूप से उड़ान भरने में सक्षम थे।

इममें कुछ कबूतर नेशनल प्लेयर भी थे। शिकायत मिलने के बाद क्राइम ब्रांच और थाने की टीम को इसकी जांच के लिए लगाया गया। पतासाजी के दौरान जानकारी मिली का केलाबाड़ी दुर्ग निवासी पुराना बदमाश व लूटेरा हैदर अली ने नागपुर के कुछ लोगों को बुलवाकर अपने घर पर रखा हुआ है और वो कुछ दिनों से लगातार प्रार्थी के घर आनाजाना कर रहा है। घटना स्थल के आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगाला गया तो हैदर अली का बेटा एरिस अपने तीन नाबालिग दोस्तों के साथ प्रार्थी के घर के आसपास घूमता दिखा। इस आधार पर पुलिस ने केलाबाड़ी के तीनों अपचारियों को हिरासत में लिया और उनसे पूछताछ करने पर चोरी का राज खुला।

घटना के बाद से आरोपी हैदर अली और उसका बेटा एरिस बाबू नागपुर भाग गए थे। पुलिस की टीम नागपुर गई। वहां पर हैदर अली के पुराने साथी ईश्वर बोरकर को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उसने हैदर अली से 85 हजार में 53 नग कबूतर खरीदने की बात स्वीकार की। उसके कब्जे से 53 कबूतर बरामद किया गया। पुलिस ने ईश्वर बोरकर को गिरफ्तार किया। बरामद 53 कबूतरों की कीमत एक करोड़ रुपये से ज्यादा आंकी गई है।

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