अंतरिक्ष में भेजे गए कुछ उपग्रह खराब होने के बावजूद वहीं चक्कर काट रहे हैं और भविष्य के उपग्रहों के लिए खतरा बन चुके हैं। इन्हें साफ करने की तकनीक ईजाद करने के लिए दुनियाभर के विशेषज्ञ लगे हुए हैं। खबर है कि अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने धरती के ऊपरी वातावरण में चक्कर काट रहे बेकार हो चुके उपग्रहों की सफाई के एक सफाई उपग्रह इसी हफ्ते भेजा है। 

यूरोपीय वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक विकसित करने का दावा किया है जिसके जरिये अंतरिक्ष के कचरे को साफ करना आसान होगा। इसे रिमूव डेबरिस नाम दिया गया है और इसमें एक जाल के साथ भालानुमा यंत्र लगा है, जो कचरे को एकत्र करने का काम करेगा। यह उपकरण सोमवार को स्पेसएक्स के रिसाइकिल रॉकेट फालकन 9 के साथ अंतरिक्ष में भेजा गया है। 

यूनिवर्सिटी ऑफ सरे द्वारा निर्मित इस सफाई यंत्र का वजन तकरीबन सौ किलोग्राम है। इसके निर्माण पर यूरोप के 10 सहयोगियों का समूह 2013 से काम कर रहा है। इसमें एयरबस और यूनिवर्सिटी ऑफ सरे का स्पेस सेंटर भी शामिल है। एक अनुमान के मुताबिक धरती के ऊपरी वातावरण में चक्कर लगा रहे बेकार उपग्रह के तकरीबन पांच लाख टुकड़े हैं, जो भविष्य के मिशनों के लिए खतरा बन सकते हैं।

यह कचरा मार्बल के टुकड़े जितना या उससे बड़ा हो सकता है। इसमें ऐसे उपग्रह हो सकते हैं, जिनका धरती से संपर्क टूट गया या किसी अंतरिक्षयात्री के हाथ से भूल से निकल गया दस्ताना हो सकता है। अनुमान है कि 20 हजार से ज्यादा कचरे के टुकड़ों का आकार सॉफ्टबॉल से बड़ा है। यह कचरा 1.75 मील प्रति घंटे की रफ्तार से हवा में तैर रहा है। यह रफ्तार एक रॉकेट या सैटेलाइट को नुकसान पहुंचाने के लिए काफी  है। 

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