कोंडागांव (शंभू यादव)। जिला मुख्यालय से लगे कुम्हारपारा में भरण-पोषण के लिए जातिगत कार्य छोड़ दूसरा कार्य करने से दो परिवारों को सामाजिक बहिष्कार का दंश झेलना पड़ रहा है। अब पीड़ित परिवार का कोई भी सदस्य समाज के किसी भी व्यक्ति के घर आ-जा नहीं सकता। यही नहीं उन्हें पड़ोस के सुख-दुख, मरनी-छट्टी या शादी-सगाई में भी जाने की अनुमति नहीं है।

पीड़ित परिवार ने मामले की शिकायत कलेक्टर से जनदर्शन में की है। जिला मुख्यालय से लगा कुम्हारपारा अपनी कलाकृतियों के लिए मशहूर है। यहां के कुम्हार मिट्टी से बर्तन व अन्य सामान बनाते हैं। इन्हीं में से सुरेंद्र चक्रधारी और उनके जीजा कमल सिंह चक्रधारी का परिवार है। दोनों ही प्राथमिक शाला कुम्हारपारा में 2012 से अंशकालीन स्वच्छक पद पर 2000 रुपये के लिए अस्थाई तौर पर नियुक्त हैं। परिवार पेशे से कुम्हार है और मिट्टी के बर्तन बनाता है लेकिन इससे परिवार का गुजर-बसर नहीं हो रहा था। परिवार के मुखियाओं का अंशकालीन स्वच्छक पद पर नियुक्त होना समाज प्रमुखों को इतना नागवार गुजरा कि उनका सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया।

परिवार में हैं 14 सदस्य

सुरेंद्र के परिवार में माता-पिता, चार भाई समेत 10 सदस्य हैं। कमल सिंह चक्रधारी इसी परिवार के दामाद हैं और इनका 4 सदस्यों का अलग परिवार है। सुरेंद्र के पिता व भाई मिट्टी का काम करते हैं। गांव के प्रमुखों का ना कलेक्टर से पीड़ित परिवार ने समाज के जिला अध्यक्ष, संभागीय अध्यक्ष व अन्य के विरूद्ध लिखित शिकायत की गई है। इनका आरोप है कि समाज प्रमुखों ने उन्हें स्वच्छक पद पर कार्य करने के चलते बहिष्कृत कर दिया है।

जांच टीम गठित: कलेक्टर

कलेक्टर नीलकंठ टेकाम ने कहा है कि मामले की जांच के लिए दल गठित किया गया है। यदि मामला सच पाया गया तो पहले समाजजनों को समझाइश दी जाएगी। फिर भी निपटारा नहीं हुआ तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

निर्णय संविधान के खिलाफ

अधिवक्ता संघ के जिलाध्यक्ष आरके मेश्राम के मुताबिक समाज का फैसला संविधान में दिए गए समानता के अधिकार के खिलाफ है। इसके लिए कानून में दंडात्मक प्रावधान भी हैं। पीड़ित अपने क्षेत्र के थाने में इसकी शिकायत कर सकता है। वे न्यायालय में परिवाद भी दायर कर सकते हैं।

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