पाकिस्तान का दोहरा चेहरा एक बार फिर सबके सामने आ गया है। पाकिस्तान अपने प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी के अमेरिका के शहर न्यूयार्क के सुप्रसिद्ध जॉन एफ केनेडी (जेएफके) एयरपोर्ट पर सिक्युरिटी जांच पर अपनी गहरी आपत्ति जता रहा है। बात इतनी सी है कि वहां शाहिद खाकान अब्बासी की भी किसी सामान्य इंसान की तरह से तलाशी ले ली गई। उनके कपड़े तक उतरवा दिए गए। पाकिस्तान मीडिया भी अब्बासी की नंगा तलाशी किए जाने से नाराज है। सवाल यह है कि अब अमेरिका को बुरा-भला कहने वाला पाकिस्तानी समाज और मीडिया तब क्यों चुप था जब कुलभूषण जाधव की माँ और पत्नी की चूडिय़ां और मंगलसूत्र तक उतरवाई गईं थी। उनजाहिलों को यह क्या मालूम था कि किसी भी सुहागिन की चूडयि़ां और मंगल सूत्र उतरवाना किसी पाप से कम नहीं है। उन सुहागिनों ने पाकिस्तान को कोसा तो खूब होगा। देखा जाए तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की अमेरिकी एयरपोर्ट पर हुई दुर्गति से जिसकी आँखों को सुकून न मिले, वो और कुछ भी हो, राष्ट्रवादी भारतीय तो नहीं ही हो सकता।
पिछले दिनों अब्बासी अपनी बीमार बहन को देखने अमेरिका गए थे। वैसे तो कहने को यह उनका निजी दौरा था। पाकिस्तान मीडिया का कहना है कि यह निजी दौरा था, तब भी प्रधानमंत्री के पास डिप्लोमैटिक पासपोर्ट है। ऐसे में उनकी जांच करना गलत है। क्यों गलत है भाई? जो देश सारे संसार को आतंकवाद की सप्लाई कर रहा है, उसे यह अमेरिका कैसे मान ले कि उसका प्रधानमंत्री बहुत नेक इंसान ही होगा?  यह किसे नहीं पता कि अब्बासी उसी मुल्क के प्रधानमंत्री हैं, जिसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई दूसरे मुल्कों के विमानों का अपहरण करवाती है। 24 दिसंबर,1999 को इंडियन एयरलाइंस विमान का काठमांडू से अपहरण कर लिया गया था। इस अभागे विमान को काठमांडू के त्रिभुवन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरना था। जब यह विमान आसमान में था, तब इसका अपहरण कर लिया गया था। पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन हरकत उल मुजाहिदीन ने आईएसआई की मदद से ही इसका अपहरण किया था। इसका तो अब खुलासा हो चुका हैढ्ढ आईएसआई मतलब पाकिस्तानी सेना का एक अटूट अंग। अब अगर इस तरह के धूर्त देश के प्रधानमंत्री की चेकिंग होती है तो इसमें बुराई ही क्या है। इससे पहले अमेरिका ने 7 पाकिस्तानी कंपनियों को परमाणु व्यापार के शक में बैन कर दिया था। कहा तो यह भी जा रहा है कि अमेरिका पाकिस्तानी सरकार पर वीजा बैन समेत कई और प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है ।
पाक से खफा अमेरिका
दरअसल आतंकवाद पर नरमी के चलते ही अमेरिका पाकिस्तान से खफा है। अब्बासी की सख्त तलाशी लिए जाने से अपने देश के कुछ निर्लज्ज लोग भी सोशल मीडिया पर टिप्पणियां करते नहीं थक रहे है। इस घटना को वे दक्षिण एशिया से जोडऩे लग गए हैं। इन मंद बुद्धि वालों पर तरस ही खाया जा सकता है। ये सारे सिरफिरे उस देश के साथ खड़े हो रहे हैं, जिसने 2008 में मुंबई में आतंकी हमला करके तबाही मचाई थी। सैकड़ों मासूमों को मौत के घाट उतारा था। इतने दिल-दहलाने वाले खून-खराबे के बाद पाकिस्तानी सरकार उन आतंकियों को सजा नहीं दे पाई है, जो मुंबई हमलों के लिए जिम्मेदार थे। उस हमले का सूत्रधार हाफिज सईद मजे से लाहौर में बैठकर भारत के खिलाफ जहर उगल रहा है। जरा देख लें कि उसी देश के प्रधानमंत्री की तलाशी से हमारे ही देश के कुछ सिरफिरे लोग दुबले हो रहे हैं। वे इस तथ्य को नजरअंदाज कर रहे हैं कि हमारा ही पड़ोसी देश कश्मीर में भारत के दुश्मनों को खाद-पानी देता रहता है। जबकि पाकिस्तान की औकात तो अमेरिका को अच्छी तरह से पता है। आखिऱ उसने ही तो आतंक के पर्याय बन चुके ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान में जाकर मारा था। तब बराक ओबामा अमेरिकी राष्ट्रपति थे। अब आप ही बताएं कि जो देश लादेन को शरण देता रहा हो, उसके प्रधानमंत्री से और क्या सभ्यव्यवहार किया जाए। अगर वे खुद सभ्य होते तो उनके साथ जरूर ही कायदे का व्यवहार भी होता।
बहुत कुछ खो सकता है पाक
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पाकिस्तान को बार-बार चेतवानी दे रहे हैं क्योंकि पाकिस्तान तालिबान और अन्य आतंकवादी संगठनों को अपनी धरती पर सुरक्षित पनाहगाह मुहैया करा रहा है। अमेरिका ने पाकिस्तान को अब सीधे शब्दों में बता दिया है कि पाकिस्तान अपराधियों और आतंकवादियों के साथ गठजोड़ के कारण अब बहुत कुछ गंवा सकता है। अमेरिका पाकिस्तान को अपने निकट के पड़ोसियों भारत और अफगानिस्तान के खिलाफ राज्येतर तत्वों को इस्तेमाल करने की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति पर भी कसकर डांट पिला चुका है।
9/11 ने बदला अमेरिका को
दरअसल अमेरिका की आतंकवाद विरोधी निति 9/11 के बाद हमेशा-हमेशा के लिए बदल गया। सन 2001 में अल कायदा के 19 आतंकियों ने अमेरिका में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, पेंटागन और पेन्सिलवेनिया में एक साथ सबसे बड़े आतंकी हमले को अंजाम दिया था। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री अब्बासी के साथ जो कुछ हुआ उसे  9/11 हमले की घटना से जोड़कर देखा जाना चाहिए । सन  2001 में अल कायदा के आतंकियों ने अमेरिका में एक भयानक आतंकी हमले को अंजाम दिया था। आतंकियों ने चार पैसेंजर एयरक्राफ्ट हाईजैक किए थे, जिसमें तीन प्लेन पर सही निशाना लगा। आतंकियों ने दो यात्री विमान वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के टावर में घुसा दिए थे। वहीं, तीसरे विमान से पेंटागन पर हमला किया गया, जबकि चौथा विमान पेन्सिलवेनिया में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। उस हमले में 400 पुलिस अफसरों और फायर फाइटर्स समेत 2983 लोगों की मौत हुई थी। हमले में मरने वालों में 57 देशों के नागरिक शामिल थे।
हमले के पीछे अल कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन का हाथ था। हमले का बदला लेते हुए अमेरिका ने 2 मई, 2011 को पाकिस्तान के ऐबटाबाद में ओसामा को मार गिराया था। निश्चित रूप से 9/11 के बाद अमेरिका हमेशा-हमेशा के लिए बदल गया। निस्संदेह उस 9/11 हादसे के बाद अमेरिका ने अपनी आतंरिक सुऱक्षा में सेंध नहीं लगने दी। अमेरिका ने अपनी सुरक्षा नीतियों में व्यापक बदलाव किए। अमेरिका आने वाले पर्यटकों पर कड़ी नजर रखी जाने लगी और कई देशों को दिए जाने वाले वीजा में भारी कटौती की गई। अमेरिका में आने वाले पाकिस्तानियों को लेकर वे बेहद कठोर रवैया अपनाते हैं। उन्हें मालूम है कि पाकिस्तान से आने वाला शख्स दूध का धुला होगा इसकी कोई गारंटी नहीं ले सकता। इसलिए वो उनकी सख्त जांच करते हैं। अपनी इस नीति पर चलने के कारण ही उन्होंने प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी के भी कपड़े उतरवा दिए। हम चाहें तो अमेरिका से भारत की सरकार भी कुछ सीख ले सकती हैं। अमेरिका में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सारा अमेरिका एक है। क्या यह बात हमारे देश को लेकर भी कही जा सकती है? शायद अभी तक तो नहीं।                  (लेखक राज्य सभा सदस्य हैं)

                                                                                                                                                                         आर.के. सिन्हा

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