प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के 'नमोÓ और कांग्रेस के 'विदआईएनसीÓ ऐप पर राजनीति गरमा गई है। दोनों राष्ट्रीय राजनीतिक दलों ने एक-दूसरे पर ऐप के जरिए उपयोगकर्ताओं का डाटा चोरी कर विदेशी कंपनी को देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। एक ओर कांग्रेस कह रही है कि भाजपा नमो ऐप के जरिए उपयोगकर्ताओं की जानकारी हासिल कर उसे अमेरिका की कंपनी को दे रही है। राहुल गांधी ने इस संबंध में यहाँ तक कह दिया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 'बिग बॉसÓ की तरह जनता की जासूसी कर रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी ने इन आरोपों का जोरदार पलटवार किया। सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी ने विशेषण का उपयोग करते हुए ट्वीट किया कि राहुल गांधी जी छोटा भीम भी जानता है कि ऐप पर सामान्य रूप से मांगी गई अनुमति का मतलब जासूसी नहीं होता। बहरहाल, कांग्रेस के एक प्रवक्ता ने वर्तमान सरकार के लिए नया नारा भी गढ़ लिया- 'अबकी बार डाटा लीक सरकार।Ó सोशल मीडिया के टूल्स को लेकर राजनीतिक दलों का इस प्रकार झगडऩा पहली बार है। दरअसल, डाटा चोरी का मुद्दा फेसबुक से चोरी हुए लोगों के डाटा प्रकरण के बाद बड़ा बन गया है। आरोप है कि फेसबुक से चोरी डाटा का उपयोग अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप ने अपने चुनावी अभियान में किया। डाटा चोरी का उपयोग चुनाव में सफलता प्राप्त करने के लिए किया जा सकता है, यह जानकारी सामने आने के बाद कांग्रेस के खेमे में बहुत हलचल है। क्योंकि, डिजिटल मंच पर भाजपा की जितनी मजबूत उपस्थिति है, उसके सामने कांग्रेस कहीं नहीं टिकती। 'डाटा चोरीÓ का किस प्रकार और कितना लाभ मिलता है, इस पर अभी कुछ कहना उचित नहीं होगा। किंतु, यह बात सही है कि डिजिटल मीडिया में भाजपा की मजबूत उपस्थिति का लाभ पिछले आम चुनाव में उसे मिला है। देश के ज्यादातर युवा सोशल मीडिया का उपयोग करते हैं। उसी माध्यम का उपयोग कर भाजपा ने युवाओं तक अपनी पहुँच बनाई है। हम दोनों ऐप की तुलना करें तो समझ जाएंगे कि डिजिटल मंच पर भाजपा कहां खड़ी है और कांग्रेस कहां? 'नमो ऐपÓ को जहाँ ५० लाख से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है, वहीं 'विदआईएनसीÓ ऐप के खाते में महज १५ हजार डाउनलोड ही है। चौकाने वाली बात यह है कि भाजपा पर ऐप के जरिए लोगों की जासूसी करने का आरोप लगाने वाली कांग्रेस ने अचानक से गूगल प्लेस्टोर से अपना ऐप हटा लिया है। ऐप हटाने से भाजपा का आरोप अधिक मजबूत हुआ है। भाजपा ने कहा कि कांग्रेस अपने ऐप के जरिए उपयोगकर्ताओं की निजी सूचनाओं को सिंगापुर की थर्ड पार्टी को भेज रही है। यदि कांग्रेस ईमानदार है, तो उसे भाजपा की तरह अपने ऐप को सार्वजनिक प्लेटफोर्म पर उपलब्ध रहने देना चाहिए था। इस संबंध में हैकर एलियट एल्डरसन का कहना भी महत्वपूर्ण हो जाता है। एल्डरसन ने घोषणा की थी कि वह कांग्रेस के ऐप के संबंध महत्वपूर्ण खुलासे करूंगा। एल्डरसन और दूसरे खुलासे करता उससे पहले ही कांग्रेस ने अपना ऐप हटा लिया। इससे कांग्रेस का ऐप और व्यवहार अधिक संदिग्ध हो गया है। बहरहाल, डाटा चोरी की यह बहस एक ओर सामान्य व्यक्ति के हित में है। इस संबंध में भविष्य में कोई नीति बनने की उम्मीद है। ताकि लोगों की निजी जानकारियां सुरक्षित रहें। दूसरी ओर, डाटा चोरी पर हो रही बहसों ने सामान्य व्यक्ति के मन में डिजिटल दुनिया को लेकर अविश्वास भी उत्पन्न किया है। उसके मन में यह बात कहीं न कहीं घर कर रही है कि अभी डिजिटल माध्यम बहुत सुरक्षित नहीं है। हालाँकि यह बात सब जगह एक समान लागू नहीं होती है। किंतु, अब सामान्य लोग थोड़ा जागरूक होंगे और समझ कर डिजिटल माध्यमों का उपयोग करेंगेे। 

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