न्यूयॉर्क: फेसबुक के लिए मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रहीं हैं, अमेरिकी और ब्रिटेन के समाचार पत्रों में कैम्ब्रिज एनालिटिका स्कैंडल पर माफी मांगने के बाद सोशल नेटवर्किंग साइट अब एंड्रॉयड उपकरणों से फोन नंबर तथा टेक्स्ट मैसेज हासिल करने को लेकर सवालों के घेरे में आ गई है. वेबसाइट ‘आरस टेक्निक’ की खबर के अनुसार फेसबुक द्वारा एकत्रित किया गया डाटा देखने पर यूजर्स ने पाया कि उसमें उनके वर्षों पुराने कॉन्टेक्ट, टेलीफोन नंबर, कॉल की अवधि और टेक्स्ट मैसेज हैं.

फेसबुक ने कहा कि जानकारी सर्वर को सुरक्षित करने के लिए अपलोड की गई और यह केवल उन्हीं यूजर्स की है, जिसकी उन्होंने अनुमति दी है. प्रवक्ता ने बताया कि इस डाटा को यूजर्स के मित्रों को अथवा किसी बाहरी को न तो बेचा गया न ही किसी के साथ साझा किया गया. कंपनी ने कहा कि उसने टेक्सट मैसेज या कॉल से जुड़ी सामग्री एकत्रित नहीं की. प्रवक्ता ने कहा कि फेसबुक मैसेंजर में कॉन्टेक्ट्स की रैंकिंग के लिए (ताकि उसे ढूंढना आसान हो जाए) और कॉल करने का सुझाव देने के लिए इन जानकारियों का इस्तेमाल किया गया.

इससे पहले फेसबुक प्रमुख मार्क जुकरबर्ग ने डेटा चोरी के गंभीर आरोपों को लेकर ब्रिटेन और अमेरिका के नौ प्रमुख अखबारों में पूरे पेज का माफीनामा दिया. उन्होंने बताया, ‘‘आपकी जानकारियों की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है. अगर हम नहीं कर पाते हैं तो हम इसके हकदार नहीं है.’’ ब्रिटेन के बड़े अखबारों‘ मेल ऑन संडे’, ‘द संडे टाइम्स’ और‘ द ऑब्जर्वर’ के साथ- साथ ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’, ‘वॉशिंगटन टाइम्स’ और ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ में इन विज्ञापनों का प्रकाशन किया गया है. जुकरबर्ग ने कहा है कि एक शोधार्थी ने एक क्विज विकसित किया था ‘जिससे 2014 में करोड़ों लोगों के डेटा में सेंध लगी.’ उन्होंने कहा, ‘‘यह विश्वास तोड़ने वाला था और हमें इस बात का खेद है कि हमने तब बहुत कुछ नहीं किया. भविष्य में ऐसा ना हो, इसे सुनिश्चित करने के लिए अब हम कदम उठा रहे हैं.’’

ब्रिटिश डेटा विश्लेषण कंपनी, कैम्ब्रिज एनालिटिका पर आरोप है कि उसने पांच करोड़ फेसबुक उपयोगकर्ताओं के निजी डेटा बिना उनकी मंजूरी के चुरा लिए हैं और उसका उपयोग राजनेताओं की मदद के लिए किया गया, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ब्रेक्सिट अभियान शामिल हैं. कंपनी पर आरोप है कि उसने 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान मतदाताओं को डोनाल्ड ट्रंप के पक्ष में प्रभावित करने के लिए फेसबुक के पांच करोड़ उपयोगकर्ताओं की व्यक्तिगत जानकारियों का दुरुपयोग किया था. इस मामले के सामने आने के बाद फेसबुक और कैंब्रिज एनालिटिका दोनो को यूरोपीय संघ, ब्रिटेन समेत अमेरिका में भी कानूनी कार्रवाइयों का सामना करना पड़ रहा है. दोनों कंपनियां इस मामले को लेकर भारी आलोचना झेल रहीं हैं.

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