नई दिल्ली: एक रिपोर्ट के अनुसार यदि लोगों की पसंद वाली भारतीय भाषाओं में इंटरनेट उपलब्ध होता है तो 20 करोड़ से अधिक वे लोग भी इसका इस्तेमाल करने को प्रोत्साहित होंगे जो अभी इससे दूर हैं. आईएएमएआई व कंटर आईएमआरबी की एक रिपोर्ट ‘ इंटरनेट इन इंडिक’ में यह निष्कर्ष निकाला गया है. इसके अनुसार देश के शहरी इलाकों में लगभग 19.3 करोड़ उपभोक्ता भारतीय भाषाओं में इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं. वहीं ग्रामीण भागों में 14.1 करोड़ उपयोक्ताओं को ही अपनी भाषा में आनलाइन सामग्री मिल पाती है.

देश में इंटरनेट उपयोक्ताओं की कुल संख्या दिसंबर 2017 के आखिर तक लगभग 48.1 करोड़ है. रिपोर्ट में कहा गया है कि फिलहाल इंटरनेट से दूर लोगों का मानना है कि अगर भारतीय भाषा में सामग्री उपलब्ध होती है तो भविष्य में वे इंटरनेट का इस्तेमाल करना शुरू करेंगे. इसके अनुसार अगर देश में इंटरनेट पर भारतीय भाषाओं को बढ़ावा दिया जाता है तो अनुमानित20.5 करोड़ नये उपयोक्ता इसका इस्तेमाल शुरू करेंगे. 

इस साल के आखिर तक 1 लाख Wi-Fi हॉस्पॉट 
बता दें कि सार्वजनिक क्षेत्र की दूरसंचार कंपनी भारत संचार निगम लि. (बीएसएनएल) की 2018 के अंत तक देशभर में एक लाख वाईफाईहॉट-स्पॉट लगाने की योजना है. यह वाईफाई नेटवर्क भागीदारों के साथ राजस्व भागीदारी के अलावा बीएसएनएल के खुद के पूंजी व्यय मॉडल के आधार पर लगाए जाएंगे.

'करीब 18,000 वाईफाई सुविधा स्थल पहले ही बनाए जा चुके हैं' 
बीएसएनएल के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक अनुपम श्रीवास्तव ने कहा कि करीब 18,000 वाईफाई सुविधा स्थल पहले ही बनाए जा चुके हैं. बीएसएनएल ने बुधवार को गुजरात के वलसाड जिले के उदावाड़ा गांव में क्वाडजेन के साथ भागीदारी में मुफ्त वाईफाई सेवा की शुरुआत की. इस गांव को सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी ने संसद आदर्श ग्राम योजना के तहत गोद लिया है.

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