लगभग दो दशक से रूस पर शासन कर रहे ब्लादिमीर पुतिन को एक बार फिर वहाँ की जनता ने छह वर्ष के लिए अपना राष्ट्रपति चुन लिया है। बीते रविवार को रूस में राष्ट्रपति पद के लिए हुए चुनाव में पुतिन को लगभग 77 फीसदी वोट मिले, जबकि उनके सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी पावेल ग्रूदिनिन को 11.8 फीसदी। हालांकि उनके सबसे मुखर विरोधी अलेक्सी नैवलनी को कानूनी आधार पर चुनाव लडऩे से रोक दिया गया था। इस विराट जीत ने ब्लादिमीर पुतिन को विश्व मंच पर रूस के बेहद मजबूत नेता के रूप में फिर से स्थापित कर दिया है। इससे पहले चीन में राष्ट्रपति शी चिनफिंग दो कार्यकाल की समय सीमा समाप्त करवा कर अपने लिए आजीवन राष्ट्रपति बने रहने की राह खुलवा चुके हैं। अर्थात् अब जब तक शी चिनफिंग चाहेंगे, तब तक वह चीन के राष्ट्रपति रह सकते हैं। यह एक तरह से तानाशाही जैसा है। चीन में साम्यवादी दल की सरकार है और साम्यवाद अपने आप में तानाशाही विचार है। बहरहाल, देखने में आ रहा है कि दुनिया में एक समान विचार आम समाज में चल रहा है और उसके आधार पर वह अपने लिए दृढ़ इच्छाशक्ति का नेतृत्व चुन रही है। भारत और अमेरिका के चुनाव भी इसी बात की हामी भरते हैं। भारत में प्रधानमंत्री के तौर पर नरेन्द्र मोदी के नाम का चयन इसलिए ही हुआ ताकि देश को सशक्त नेतृत्व मिल सके। अमेरिका की जनता ने भी डोनाल्ड ट्रंप को इसलिए ही चुना। बीते दिन ही ब्लूमबर्ग मीडिया का एक आकलन आया है, जिसमें बताया गया है कि रूस और चीन की तरह भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कार्यकाल भी लंबा चलेगा। दुनिया के १६ देशों के कद्दावर नेताओं का उन्होंने अध्ययन किया है। अपने अध्ययन के आधार पर ब्लूमबर्ग मीडिया समूह ने माना है कि विश्व पटल पर उत्पन्न हो रहे संकटों निपटने में जो नेता सक्षम है, उनमें एक नाम भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हैं। ब्लूमबर्ग का आकलन है कि नरेन्द्र मोदी वर्ष २०२९ तक भारत के प्रधानमंत्री बने रह सकते हैं। वर्तमान वातावरण में देखें तो ब्लूमबर्ग का यह आकलन यथार्थ के बहुत नजदीक दिखाई देता है। भारत की राजनीति में अभी प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता के नजदीक कोई नहीं ठहरता है। किंतु, यह भी सत्य है कि प्रधानमंत्री मोदी को हराने के लिए राजनीतिक दलों के साथ ही एक वैचारिक धारा के लेखक-साहित्यकार लोग भी गुणा-भाग करने में लगे हुए हैं। यह आने वाला समय बताएगा कि भारत के नागरिक किसका चुनाव करते हैं? क्या रूस, अमेरिका और चीन की तरह भारत के लोग भी दृढ़ संकल्पित और अनथक परिश्रम करने वाले राजनेता का चुनाव करेंगे? यदि वर्तमान समय में देखें तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से बेहतर विकल्प जनता के पास है नहीं। प्रधानमंत्री मोदी भी निरंतर जनता के भरोसे पर खरा उतरने का प्रयास कर रहे हैं। देश का एक पारदर्शी व्यवस्था देने के लिए उन्होंने राजनीतिक दृष्टि से बहुत जोखिम भरे नोटबंदी और जीएसटी जैसे निर्णय भी लिए हैं। यदि ब्लूमबर्ग मीडिया का अनुमान सत्य सिद्ध होता है, तब संभव है कि भारत भी रूस, चीन और अमेरिका की तरह विराट शक्ति के रूप में विश्व मंच पर अपनी जगह बना ले। 

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