संसद में विपक्षी दलों ने मंगलवार को जिस प्रकार हंगामा किया है, वह काफी निराशाजनक है। विपक्षी दलों ने गैर-जिम्मेदार एवं असंवेदनशील व्यवहार को प्रकट किया है। संसद में शायद ही ऐसी स्थिति कभी आई हो कि शोक समाचार देने के दौरान विपक्ष ने हंगामा खड़ा किया हो। विपक्षी दलों के हंगामे के कारण विदेश मंत्री सुषमा स्वराज इराक में मारे गए 39 भारतीयों के संबंध में अपना बयान नहीं पढ़ सकीं। सुषमा स्वराज जब यह बताने का प्रयास कर रही थीं कि आईएसआईएस ने इराक में अगवा किए गए ३९ भारतीयों की हत्या कर दी थी, तब संसद में राजनीतिक दल अपने निहित राजनीतिक स्वार्थों को लेकर हंगामा कर रहे थे। इन राजनीतिक दलों ने अभी तक इस सत्र की संसद को सुचारू ढंग से नहीं चलने दिया है। संसद को ठप करके रखा है। बाकी समय विपक्षी दलों का जो भी व्यवहार रहा हो, वह अपनी  जगह ठीक हो सकता है। किंतु जब अपने ही देश के नागरिकों की मौत के संबंध में विदेश मंत्री सदन के माध्यम से देश को कोई जानकारी दे रही थी, तब तो कम से कम थोड़ा संयम बरतना चाहिए था। उनका यह व्यवहार किसी भी प्रकार उचित नहीं ठहराया जा सकता है। सांसदों का व्यवहार, उनकी नारेबाजी और प्रदर्शन देखकर लोकसभा की अध्यक्ष सुमित्रा महाजन भी बहुत भावुक हो गईं। उन्होंने जो कहा, उससे किसी पत्थर का हृदय भी पसीज जाता। लोकसभा अध्यक्ष महाजन ने बहुत ही भावुक होकर सांसदों से निवेदन किया- 'यह 39 देशवासियों की मौत की बात है, थोड़ी संवेदनशीलता बरतें। यह सही तरीका नहीं है। इतने भी संवेदनहीन मत बनिए।Ó क्या सभापति के इतना कहने के बाद विपक्षी दलों को संयम नहीं दिखाना चाहिए था? क्या वह थोड़ी देर मौन नहीं रख सकते थे? यह सब संभव था। वह विदेश मंत्री के वक्तव्य के बाद भी अपनी माँगों को लेकर हंगामा कर सकते थे, जैसा कि पिछले दिनों से करते आ रहे हैं। किंतु, इतनी मार्मिक टिप्पणी का भी विपक्ष पर असर नहीं हुआ। इसका संदेश यही जाता है कि विपक्ष को सिर्फ अपनी राजनीति की चिंता है। उसे देश और देश के लोगों की कोई परवाह नहीं। विपक्ष का संवेदनहीन व्यवहार देखकर लोकसभा अध्यक्ष ने उचित ही कहा कि देश ने इससे पहले इतनी खराब हालत नहीं देखी। संसद का यह दृश्य विपक्षी दलों के असंवेदनशील व्यवहार के लिए याद रखा जाएगा। विदेश मंत्री कोई साधारण घटना पर अपना वक्तव्य नहीं दे रही थीं। इराक के मौसुल में तीन साल पहले 39 भारतीय अगवा हुए थे। अगवा भारतीय वहाँ रोजगार के लिए गए थे, ताकि अपने परिवार का पोषण कर सकें। तीन साल से सभी परिवार 39 भारतीय नागरिकों की राह देख रहे थे। पहले भी यह बात आई थी कि आतंकवादी समूह इस्लामिक स्टेट ने उनकी हत्या कर दी है। किंतु, भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने तब स्पष्ट कहा था कि जब तक कि वह पूरी तरह पुष्टी नहीं कर लेंगी, तब तक अपने लोगों को मृत घोषित नहीं करेंगी। सोमवार को जब इराक की सरकार ने यह कहा कि 38 लोगों के डीएनए सौ फीसदी मिल गए हैं, तब ही सुषमा स्वराज ने दु:खद समाचार को स्वीकार किया। बहरहाल, विपक्षी दल संसद के बाहर ही नहीं, संसद के भीतर भी अपने व्यवहार से जनता के बीच में भरोसा खो रहे हैं। निश्चित ही विपक्षी दलों को अपने आचरण का मूल्यांकन करना चाहिए। 

विदेश