बालाघाट। मप्र के नक्सल प्रभावित बालाघाट जिले के लिए यह किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है। 5 साल पहले नक्सलियों ने वाहन जलाकर जिस सड़क का निर्माण कार्य बंद करा दिया था, उसे 25 जवानों ने सुरक्षा देकर तीन महीने में बनवा दिया।

संभवत: प्रदेश की यह पहली सड़क होगी, जिसे 25 जवानों ने रात दिन बंदूक के साए में 3 महीने में पूरा कराया हो। 1 दिसंबर 2017 से काम शुरू हुआ और 9 मार्च 2018 को यह सड़क बनकर तैयार हुई है। इस सड़क से 100 से अधिक गांवों के लोग जुड़े हैं। जनवरी 2010 में बिरसा के पाथरी-राशिमेटा 15.25 किमी सड़क मंजूर हुई थी। इस सड़क का निर्माण 467.40 लाख की लागत से होना था।

यहां मजदूर के पैर में ठोक दी थी कील

- बिरसा थाना क्षेत्र में करीब 13 किमी लंबाई की चार करोड़ की लागत से सड़क निर्माण चल रहा था। मलाजखंड व तांडा दलम के नक्सलियों ने 2 जून 2010 को एक जेसीबी मशीन, एक एलएनटी मशीन, एक एमएस-70 मशीन, एक पिकअप वाहन, चार ट्रैक्टर, चार मोटर साइकिल आग के हवाले की थी। 17 मार्च 2012 में यहां नक्सलियों ने अडोरी, कोरका सड़क निर्माण में काम करने वाले एक मजदूर के पैर में कील ठोक दी थी। इसके बाद से काम बंद है।

- 2 जुलाई 2008 में लांजी थाना टेमनी में करीब 12 करोड़ की लागत से प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना में 22 किमी की सड़क को बनने की शुरुआत हुई, लेकिन नक्सलियों के डर से काम बंद है।

-23 अप्रैल 2012 को हट्टा थाना क्षेत्र के कोठिया टोला में नक्सलियों ने कसंगी सड़क निर्माण के दौरान उपयोग की जा रही पोकलेन मशीन को आग के हवाले किया था।

इनका कहना है

बालाघाट में नक्सली समस्या की वजह से जंगल में ज्यादातर विकास के कार्य पूरे नहीं हो पाए थे। जिन्हें पूरा कराने के लिए निर्माण एजेंसी और ठेकेदार कतराते थे। इन्हें पूरा कराने के लिए सुरक्षा मुहैया कराकर काम कराया गया है। पाथरी-राशिमेटा सड़क बनने से 100 से अधिक गांवों की आबादी को राहत मिलेगी।

- संदेश जैन,नक्सल सेल प्रभारी बालाघाट

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